भारतीय शेयर बाजार के लिए इस समय कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड दो बड़े जोखिम बनकर सामने आ रहे हैं।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है और अगर यह 105-110 डॉलर की रेंज में जाता है तो बाजार की धारणा पर और दबाव पड़ सकता है। ऐसे समय में ग्लोबल बाजारों की चाल का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।
अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में तेजी भी बाजार के लिए बड़ा खतरा है। 5 फीसदी से ऊपर जाने वाली अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड को गंभीर जोखिम के तौर पर देखा जा रहा है। यील्ड में तेजी से वैश्विक स्तर पर बॉन्ड और इक्विटी के बीच निवेश का आकर्षण बदल सकता है, जिससे शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है। इस वजह से निवेशकों की नजर सिर्फ कच्चे तेल पर ही नहीं, बल्कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर भी बनी हुई है।
कच्चे तेल और यील्ड की मौजूदा चाल का एक बड़ा कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी है। ट्रांसक्रिप्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का जिक्र किया गया है। विश्लेषक के मुताबिक, फिलहाल इस विवाद का कोई स्पष्ट समाधान दिखाई नहीं दे रहा है। अगर तनाव लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों पर इसका असर लंबे समय तक रह सकता है।
इसके साथ ही बाजार में एक बड़ा बदलाव वैश्वीकरण से स्थानीयकरण और प्रोटेक्शनिज्म की तरफ बढ़ना भी माना जा रहा है। अलग-अलग देश अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था और घरेलू ग्रोथ पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। ऐसे माहौल में भारतीय बाजार में भी इंडेक्स के बजाय घरेलू ग्रोथ से जुड़े चुनिंदा शेयरों पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
(शेयर मंथन, 11 सितंबर 2026)
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