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एक्सपर्ट से जानें डीलिंक इंडिया पर निवेशक की चिंता, अब आगे क्या रणनीति होनी चाहिए?

पार्थ पटेल जानना चाहते हैं कि उन्हें डीलिंक इंडिया (DE-Link India) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? उन्होंने 558 रुपये के स्तर पर खरीदा था और काफी समय से होल्ड कर रखा है। आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि मौजूदा समय में जब बाजार में कमजोरी है और निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, तब उनका सवाल स्वाभाविक है कि अब आगे क्या रणनीति अपनाई जाए, खासकर अगर बाजार और फिसलता है तो नुकसान की आशंका बढ़ सकती है। डीलिंक इंडिया के प्रदर्शन में अब तक कोई बड़ी कमजोरी नजर नहीं आती। कंपनी की औसत रेवेन्यू ग्रोथ 10–11% के आसपास रही है, जो मौजूदा आईटी और टेक सेक्टर के माहौल में एक संतुलित आंकड़ा माना जा सकता है। वैल्यूएशन की बात करें तो स्टॉक करीब 10-12 गुना, अधिकतम 13 गुना के पीई मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है, जो इसे ओवरवैल्यूड नहीं बनाता। इसके अलावा कंपनी का आरओई बेहतर है और 5% से अधिक का डिविडेंड यील्ड इसे डिफेंसिव निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है।

मौजूदा स्तरों पर मार्जिन भी स्थिर होते दिख रहे हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग 1300-1350 करोड़ रुपये के आसपास है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह स्टॉक व्यापक बाजार में चल रही बिकवाली और करेक्शन का शिकार अधिक है, न कि किसी कंपनी-विशेष की बड़ी समस्या का। मौजूदा गिरावट में जो भी नेगेटिविटी है, वह काफी हद तक कीमत में पहले ही झलक चुकी है।

हालांकि, आगे के लिए कुछ अहम बातों पर नजर रखना जरूरी होगा। आने वाले नतीजों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी की सेल्स ग्रोथ सिंगल डिजिट में तो नहीं फिसल रही। अगर बिक्री वृद्धि 11–12% या उससे ऊपर बनी रहती है, तो यह शेयर के लिए सपोर्टिव फैक्टर होगा। साथ ही, मार्जिन को लेकर बाजार की उम्मीदें बढ़ चुकी हैं, क्योंकि पिछले क्वार्टर में करीब 1% का सुधार देखने को मिला था। निवेशक यह देखेंगे कि क्या कंपनी मार्जिन को बनाए रख पाती है या डबल डिजिट मार्जिन की ओर बढ़ती है।

प्रॉफिट ग्रोथ पर भी ध्यान देना जरूरी है। पिछले कुछ क्वार्टर में मुनाफा लगभग फ्लैट रहा है और हल्की डि-ग्रोथ भी देखने को मिली थी। अगर आने वाले नतीजों में मुनाफा स्थिर रहता है और गिरावट नहीं दिखती, तो फंडामेंटल तौर पर स्टॉक में बड़ी चिंता की बात नहीं मानी जाएगी। हालांकि, आईटी सेक्टर में चल रहे कॉस्ट एडजस्टमेंट का असर यहां भी नजर आ सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मार्केट के नजरिए से देखें तो फिलहाल डिमांड कमजोर है और बिकवाली के मुकाबले खरीदारों की कमी दिख रही है। यही वजह है कि स्टॉक पर दबाव बना हुआ है। टेक्निकल रूप से अगर कभी यह शेयर 345–350 के नीचे एक नया लो बनाता है, तो वह स्थिति ज्यादा नकारात्मक मानी जाएगी। लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक मौजूदा गिरावट को व्यापक बाजार की कमजोरी का असर माना जा सकता है।

डीलिंक इंडिया में फिलहाल कोई बड़ा फंडामेंटल रेड फ्लैग नजर नहीं आता। निवेशकों को घबराहट में फैसला लेने की बजाय आने वाले नतीजों, सेल्स ग्रोथ और मार्जिन ट्रेंड पर ध्यान देना चाहिए। बाजार की कमजोरी के इस दौर में धैर्य और डिसिप्लिन ही सबसे अहम रणनीति साबित हो सकती है।


(शेयर मंथन, 24 जनवरी 2026)

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