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लगातार झटकों से मिडकैप और स्मॉलकैप दबाव में क्यों आ रही है?

बीते हफ्ते निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में तेज और लगातार गिरावट ने बाजार की चिंता बढ़ा दी। मिडकैप इंडेक्स पहले 61,600 के आसपास से गिरकर 58,850 तक आया, वहां से थोड़ी संभलन दिखी, लेकिन दोबारा 60,300 के स्तर से फिसलकर सीधे 56,700 के करीब पहुंच गया।

 बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि फिलहाल यह लगभग 57,150 के आसपास बंद हुआ है। इस तरह के तीखे झटके यह साफ संकेत देते हैं कि मिडकैप सेगमेंट में करेक्शन का स्ट्रक्चर काफी हद तक पूरा हो चुका है और बाजार अब एक बेहद क्रूशियल जोन में खड़ा है।

अगर इस पूरे मूव को वीकली चार्ट पर 2020 से पढ़ा जाए, तो तस्वीर और साफ हो जाती है। 2020 से शुरू हुआ बुल साइकिल 2021 के अक्टूबर में अपने पीक पर पहुंचा था। वहां से जो करेक्शन आया, वह करीब 38% का फिबोनाची रिट्रेसमेंट था। टेक्निकल एनालिसिस में माना जाता है कि अगर बाजार 38% रिट्रेसमेंट से ही पलट जाए, तो वह बहुत मजबूत बुल मार्केट का संकेत होता है। यही पैटर्न बाद में अगले साइकिल में भी देखने को मिला, जहां मिडकैप ने दोबारा लगभग 38% का रिट्रेसमेंट किया और फिर नया हाई बनाया। इससे यह स्थापित होता है कि मिडकैप का लॉन्ग-टर्म ट्रेंड अब भी स्ट्रक्चरली मजबूत रहा है।

लेटेस्ट करेक्शन को देखें तो मिडकैप इंडेक्स फिर से लगभग 38% रिट्रेसमेंट के आसपास, यानी 56,000 के करीब पहुंच चुका है। दिलचस्प बात यह है कि इसी स्तर पर 50-52 हफ्ते का मूविंग एवरेज भी मौजूद है। यानी फिबोनाची रिट्रेसमेंट और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज, दोनों का संगम इस ज़ोन को बेहद अहम बनाता है। थ्योरिटिकली देखा जाए तो यहां से बाउंस या रिवर्सल के चांस बनते हैं, हालांकि बाजार कभी भी बिल्कुल सटीक लेवल से नहीं पलटता, यह बात ध्यान में रखना जरूरी है।

स्मॉलकैप की कहानी मिडकैप से थोड़ी अलग और ज्यादा आक्रामक है। जहां मिडकैप हर बड़े करेक्शन में करीब 38% तक ही गिरा, वहीं स्मॉलकैप ने बार-बार 50% या उससे ज्यादा का रिट्रेसमेंट दिखाया है। यही वजह है कि स्मॉलकैप का रिएक्शन हमेशा मिडकैप से ज्यादा तीखा होता है, चाहे गिरावट हो या तेजी। मौजूदा करेक्शन में भी स्मॉलकैप लगभग 50% रिट्रेसमेंट के आसपास पहुंच चुका है और कुछ मामलों में उससे नीचे भी फिसलता नजर आया है। फिर भी, टेक्निकल रूप से यह कहना गलत होगा कि “सब कुछ खत्म हो गया है”, क्योंकि स्मॉलकैप का स्वभाव ही ओवरशूट करने का रहा है।

इस पूरे करेक्शन के दौरान एक पॉजिटिव पहलू यह रहा है कि बाजार से काफी हद तक हीट और फोमो निकल चुका है। जहां पहले हर किसी के पास माल भरा हुआ था और कोई खरीदने को तैयार नहीं था, अब वहां कैपिट्यूलेशन और पैनिक जैसे हालात बनते दिखे हैं। अक्सर ऐसे ही फेज़ के बाद या तो बॉटम बनता है या फिर लंबा कंसोलिडेशन शुरू होता है। मिडकैप और स्मॉलकैप दोनों ही फिलहाल ओवरसोल्ड ज़ोन के करीब हैं, जिससे शॉर्ट-टर्म बाउंस की संभावना बनती है।

हालांकि, मार्च 15 तक का समय बेहद अहम माना जा रहा है। एडवांस टैक्स से जुड़ी बिकवाली भारतीय बाजार में एक साइक्लिकल फैक्टर रही है, जिसे पिछले कई सालों में देखा गया है। संभव है कि बजट के बाद बाजार में एक राहत भरी तेजी आए, लेकिन उसके बाद फिर से सेलिंग प्रेशर दिखे। अगर इस दौरान मौजूदा बॉटम बना रहता है और नहीं टूटता, तो उसके बाद बाजार की स्थिति काफी हद तक संभल सकती है।


(शेयर मंथन, 26 जनवरी 2026)

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