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क्या शेयर बाजार फिर से 2021 जैसा कंसोलिडेशन बना रहा है?

बाजार के मौजूदा चार्ट को अगर कोविड के बाद की चाल के संदर्भ में देखा जाए, तो एक दिलचस्प समानता नजर आती है। जिस तरह 2021 में बाजार ने एक लंबा कंसोलिडेशन फेज दिखाया था, वैसा ही और शायद उससे थोड़ा ज्यादा गहरा कंसोलिडेशन इस समय भी बनता हुआ दिखाई दे रहा है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि हालिया गिरावट, जो करीब 26,000 के स्तर से शुरू होकर 22,700 से 22,800 के आसपास तक आई, यह संकेत देती है कि बाजार एक बड़े रेंज में फंस सकता है। इस आधार पर यह संभावना बनती है कि आने वाले महीनों में निफ्टी लगभग 22,000 से 26,000 के दायरे में ही घूमता रहे, खासकर तब जब अर्निंग्स ग्रोथ और आर्थिक आंकड़े अपेक्षा से कमजोर रहते हैं।

इस पूरे परिदृश्य में सबसे अहम भूमिका अर्निंग्स (EPS ग्रोथ) और जीडीपी ग्रोथ की है। जहां पहले 15 से 18% की अर्निंग्स ग्रोथ की उम्मीद थी, उसे अब घटाकर 10 से 13% के बीच माना जा रहा है। इसी तरह जीडीपी ग्रोथ को भी बाजार लगभग 6.5% से 7% के दायरे में डिस्काउंट कर रहा है। अगर आने वाले समय में जीडीपी 6.5% से नीचे जाती है या अर्निंग्स और कमजोर होती हैं, तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर ये आंकड़े स्थिर रहते हैं, तो माना जा सकता है कि मौजूदा गिरावट का बड़ा हिस्सा “सेंटिमेंट डैमेज” के रूप में पहले ही पूरा हो चुका है।

तकनीकी रूप से देखें तो जून 2022 से शुरू हुई रैली के आधार पर 38% फिबोनाची रिट्रेसमेंट करीब 22,000 के आसपास आता है। यह स्तर एक मजबूत सपोर्ट के रूप में उभर सकता है। अगर बाजार यहां टिकता है और ऊपर की ओर बढ़ना शुरू करता है, तो इसे कमजोरी नहीं बल्कि एक स्वस्थ करेक्शन माना जाएगा। इसका मतलब होगा कि बाजार ने लंबी तेजी के बाद जरूरी “हीट” निकाल ली है और अब आगे की रैली के लिए आधार तैयार कर रहा है।

हालांकि, एक दूसरी थ्योरी यह भी कहती है कि अगर हालात ज्यादा बिगड़ते हैं, जैसे अर्निंग्स ग्रोथ बहुत कमजोर हो जाए या आर्थिक स्थिति खराब हो तो बाजार 19,000 या उससे नीचे तक भी जा सकता है। लेकिन यह पूरी तरह आने वाले डेटा और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस तरह के बेहद निचले स्तरों की संभावना को निश्चित मान लेना जल्दबाजी होगी।

एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बाजार पिछले दो साल से ज्यादा समय से बहुत बड़ा रिटर्न नहीं दे पाया है। यानी एक तरह का “टाइम करेक्शन” भी चल रहा है, जिसमें कीमतें ज्यादा नहीं गिरतीं लेकिन समय के साथ वैल्यूएशंस संतुलित हो जाते हैं। इस लंबी अवधि के कंसोलिडेशन के बाद अगर बाजार फिर से 26,000 की ओर बढ़ता है, तो वह पहले जितना “ओवरहीटेड” नहीं होगा, बल्कि ज्यादा मजबूत और टिकाऊ रैली की संभावना बनेगी।

मौजूदा बाजार को घबराने के बजाय समझने की जरूरत है। 22,000 के आसपास का स्तर एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है, जबकि ऊपर की ओर 26,000 तक की रेंज बनी रह सकती है। आने वाले महीनों में डेटा खासकर जीडीपी और अर्निंग्स ही तय करेंगे कि बाजार इस दायरे में स्थिर रहेगा या किसी नई दिशा में आगे बढ़ेगा।

 



(शेयर मंथन, 07 अप्रैल 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

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