शेयर मंथन में खोजें

एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स

तीन दिन बाद लौटी अमेरिकी बाजारों में तेजी

लगातार तीन कारोबारी सत्रों में गिरावट के बाद अमेरिकी बाजार में हफ्ते की शुरुआत अच्छी मजबूती के साथ हुई है।

वहीं आज सुबह एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख दिखाई दे रहा है। नेशनल एसोसिएशन ऑफ रिटेलर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमरिका में अक्टूबर के दौरान नये घरों की बिक्री में 10.1% की बढ़ोतरी रही। मकानों की बिक्री सितंबर के 55.4 लाख से बढ़कर 61 लाख हो गयी है। इस खबर से बाजार में नये सिरे से खरीदारी नजर आयी। डॉव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेजेज में 133 अंक यानी 1.2% की तेजी रही। वहीं नैस्डेक कंपोजिट और एसएंडपी 500  में 1.4% की मजबूती रही। इस तेजी के साथ डॉव जोंस इस साल की नयी ऊँचाई पर पहुँच गया है।
दूसरी ओर यूरो के मुकाबले डॉलर की कमजोरी से कॉमेक्स पर सोना 18 डॉलर की तेजी के साथ 1165 डॉलर प्रति औंस के नये रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। वहीं नाइमेक्स पर कच्चा तेल 9 सेंट चढ़कर 77.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया। सुबह एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख नजर आ रहा है। डॉलर के मुकाबले येन की मजबूती के कारण जापान के निक्केई में निर्यात क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव दिख रहा है।  निक्केई में करीब 0.5% की कमजोरी है। वहीं हैंग सेंग की शुरुआत भी ढीली हुई है और वह नकारात्मक रुझान के साथ सपाट है। कॉस्पी इंडेक्स में 0.65% की गिरावट है। स्ट्रेट टाइम्स भी लाल निशान में आ गया है। चीन के शंघाई कंपोजिट में 0.5% की मजबूती दिख रही है। वहीं ताइवान वेटेड में भी हल्की तेजी है। सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज में निफ्टी वायदा सोमवार को एनएसई में बंद स्तर के मुकाबले 9 अंक की कमजोरी के साथ 5095 के आसपास कारोबार कर रहा है। (शेयर मंथन, 24 नवंबर 2009)
  

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख