शेयर मंथन में खोजें

एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स

इंडिया सीमेंट (India Cement) को हुआ घाटा, सीएसके पुनर्गठन से शेयर उछला

इंडिया सीमेंट को 2014-15 की तीसरी तिमाही में 11.68 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में इसे 42 लाख रुपये का मुनाफा हुआ था।

कंपनी की आय में इसी अवधि के दौरान 0.5% की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गयी। तीसरी तिमाही में आय पिछले साल की 1,037 करोड़ रुपये से बढ़ कर 1040 करोड़ रुपये रही। कंपनी द्वारा अपनी क्षमता का उपयोग भी पिछले साल के मुकाबले घटा है। क्षमता उपयोग का स्तर 31 दिसंबर 2014 को खत्म हुई तिमाही में 56रहा, जबकि पिछले साल की तीसरी तिमाही में कंपनी ने अपनी क्षमता का 64% उपयोग किया था।

तीसरी तिमाही के दौरान धातुमल (क्लिंकर) के साथ हुई कुल बिक्री 8% घट कर 21.07 लाख टन रही। कंपनी के मुताबिक तीसरी तिमाही में दक्षिण भारत में सीमेंट की माँग स्थिर बनी रही, वहीं आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से माँग में कोई बढ़त दर्ज नहीं हुई।

कंपनी ने साथ ही अपने पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी चेन्नई सुपर किंग्स क्रिकेट लिमिटेड के पुनर्गठन की घोषणा भी की है। कंपनी ने अपनी आईपीएल टीएम चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के फ्रेंचाइज अधिकार इस सहायक कंपनी को हस्तांतरित कर दिये हैं।

कंपनी ने अपने अपने नतीजों और सीएसके के बारे में इस फैसले की जानकारी बुधवार देर शाम को जारी दी। आज सुबह से इसके शेयर भाव में मजबूती का रुख है। दोपहर करीब 2.15 बजे बीएसई में यह 14.10 रुपये या 14.84% की जोरदार उछाल के साथ 109.10 रुपये पर चल रहा है। (शेयर मंथन, 12 फरवरी 2015)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख