शेयर मंथन में खोजें

एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स

रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications) ने चुकाया एरिक्सन (Ericsson) का कर्ज

रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications) या आरकॉम ने स्वीडिश कंपनी एरिक्सन (Ericsson) का बकाया ऋण चुका दिया है।

इसके साथ ही अनिल अंबानी (Anil Ambani) और आरकॉम के दो निदेशकों के जेल जाने का संकट खत्म हो गया है। मार्च के पहले सप्ताह में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने आरकॉम के अध्यक्ष अनिल अंबानी और दो अन्य निदेशकों को अवमानना का दोषी करार देते हुए उन्हें 4 हफ्तों के अंदर एरिक्सन की 453 करोड़ रुपये की बकाया राशि लौटाने का दिया था। एरिक्सन को आरकॉम से 4622 करोड़ रुपये मिले हैं।
उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि रिलायंस की तीनों कंपनियों की मंशा बकाया रकम का भुगतान करने की नहीं थी, इसलिए यह अदालत की अवमानना है। अदालत ने मामले में रिलायंस की बिना शर्त माफी स्वीकार करने से भी इंकार कर दिया था।
वहीं रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस जियो (Reliance Jio) के बीच लंबित स्पेक्ट्रम सौदा आपसी सहमति से समाप्त कर दिया गया है। सौदे के तहत रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस जियो को अपने स्पेक्ट्रम बेचती। यह सौदा कंपनी के ऋण को चुकाने के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
दूसरी तरफ बीएसई में रिलायंस कम्युकेनिशंस का शेयर 4.00 रुपये के पिछले बंद स्तर के मुकाबले सीधे 10% उछाल के साथ 4.40 रुपये के ऊपरी सर्किट पर खुला है। सुबह पौने 10 बजे के करीब यह 4.40 रुपये के ही भाव पर है। वहीं पिछले 52 हफ्तों में कंपनी के शेयर का सर्वाधिक भाव 26.25 रुपये और निचला स्तर 3.96 रुपये रहा है। (शेयर मंथन, 19 मार्च 2019)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख