शेयर मंथन में खोजें

सोयाबीन में थम सकती है बढ़त, सरसों में गिरावट की संभावना - एसएमसी

सोयाबीन वायदा (दिसंबर) की कीमतों की बढ़त पर रोक लगने की संभावना है।

सोयाबीन की कीमतों को 3,400-3,415 रुपये के नजदीक अड़चन का सामना करना पड़ सकता है। सोयाबीन का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर होने की खबरों के कारण बाजार का सेंटीमेंट बाधित हुआ है। सोयाबीन प्रोसेसर एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने 2018-19 के लिये किये गये अपने पहले सर्वे में अनुमान लगाया है कि 2018 में सोयाबीन का कुल उत्पादन क्षेत्रों 108.396 लाख हेक्टेयर रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.83 लाख हेक्टेयर 6.7% अधिक है। 2018 में सोयाबीन की औसत उत्पादकता 1,059 किलो ग्राम हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जबकि 2017 में 823 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर रहा है।
सरसों वायदा (दिसंबर) की कीमतों में 4,100-4,080 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है। पर्याप्त स्टॉक के साथ बुआई में अच्छी प्रगति के कारण सेंटीमेंट पर बिकवाली का दबाव बरकरार रहने की संभावना है। कारोबारी सूत्रों के अनुसार इस वर्ष सरसों की बुआई में कम से कम 10% बढ़ोतरी होने की संभावना है।
सीपीओ (नवंबर) वायदा कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है और कीमतें 540 रुपये तक लुढ़क सकती है। जाड़े के दिनों में पॉम तेल के जम जाने से माँग कम होने और बढ़ते उत्पादन के कारण मलेशियन पॉम ऑयल की कीमतें तीन वर्षों के निचले स्तर पर लुढ़क गयी हैं। रॉयटर पोल के अनुसार पिछले महीने मलेशियन पॉम ऑयल का उत्पादन 5.7% की बढ़ोतरी के साथ 1.96 मिलियन टन हो जाने का अनुमान है, जबकि भंडार 14.1% की बढ़ोतरी के साथ 2.90 मिलियन टन हो जाने का अनुमान है। मलेशियन पॉम ऑयल बोर्ड द्वारा 12 नवंबर को उत्पादन एवं स्टॉक संबंधी आँकड़े जारी किये जायगें। (शेयर मंथन, 12 नवंबर 2018)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख