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कॉटन, ग्वारसीड और चना में तेजी का रुझान - एसएमसी

कम उत्पादन अनुमान के कारण कॉटन वायदा (नवंबर) कीमतों की कीमतों में 22,200 रुपये के स्तर पर सहारे के साथ बढ़त दर्ज की जा सकती है।
भारतीय कपास संगठन के नवीनतम अनुमानों के अनुसार 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले मौजूदा सीजन 2018-19 (अक्टूबर-सितंबर) में भारत में कपास का उत्पादन 4.75 लाख बेल की कमी के साथ 343.25 लाख बेल हो सकता है। समान अवधि में घरेलू खपत 324 लाख बेल होने का अनुमान है, जबकि निर्यात 51 लाख बेल होने का अनुमान है। 2018-19 के अंत तक कपास का कैरी ओवर स्टॉक 15.25 लाख बेल रहने का अनुमान है।
ग्वारसीड वायदा (दिसंबर) की कीमतों में तेजी का रुझान रहने की संभावना है। ग्वारसीड की कीमतें 4,630 रुपये नजदीक सहारे के साथ 4,850-4,900 रुपये तक पहुँच सकती हैं। कम उत्पादन अनुमान के कारण फंडामेंटल काफी बेहतर हैं। 2018-19 (अक्टूबर-सितंबर) में ग्वारसीड का उत्पादन पिछले वर्ष के 60-70 लाख बैग की तुलना में कम होकर 40-45 लाख बैग होने का अनुमान है। इस प्रकार कैरी ओवर स्टॉक सहित ग्वारसीड की कुल उपलब्धता 130 लाख बैग से अधिक नही हो सकती है। ग्वारगम के निर्यात के लिए भारत में लगभग 100 लाख बैग ग्वारसीड की पेराई होती है।
चना वायदा (दिसंबर) की कीमतों में तेजी का रुझान रहने की संभावना है। चना की कीमतें 4,700-4,750 रुपये के स्तर पर पहुँच सकती हैं। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश कर्नाटक और राजस्थान में अभी तक चना की बुआई संतोषजनक नहीं है और पिछले वर्ष की समान अवधि के औसत बुआई क्षेत्र से कम हुई है, लेकिन साप्ताहिक आधार पर बुआई की रफ्तार सामान्य है। (शेयर मंथन, 12 नवंबर 2018)

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