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जीरा और धनिया के लिए है बाधा - एसएमसी

हल्दी वायदा (सितंबर) की कीमतों के 6,450-6,600 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।

हाजिर बाजारों में सुस्त माँग और 2019-20 (जुलाई-जून) सीजन में अधिक उत्पादन की उम्मीद से कीमतों पर दबाव रह सकता है। छह महीने के लिए भारत को अमेरिकी प्रतिबंध से छूट समाप्त होने के बाद मई से ईरान को निर्यात में लगभग एक ठहराव सा आ गया है। ईरान के बाजार के बिना, भारतीय हल्दी उत्पादकों के हाथ में कोई बड़ा ऑर्डर नहीं है। तेलंगाना के बेंचमार्क बाजार निजामाबाद में, फिंगर वेराइटी की कीमत लगभग 6,500-6,600 रुपये प्रति 100 किलोग्राम रही है, जबकि बल्ब वेराइटी की कीमत 6,400-6,500 रुपये प्रति 100 किलोग्राम रही है।
जीरा वायदा (सितंबर) की कीमतों को 17,030 रुपये के स्तर के पास रुकावट का सामना करना पड़ रहा है। आगामी रबी सीजन के दौरान जीरे के उत्पादन क्षेत्रों में वृद्धि की उम्मीद कीमतों में नरमी का रुझान देखा जा रहा है। चूंकि अनुकूल मौसम के कारण आगामी रबी सीजन में फसल की संभावनाएँ बेहतर होने की उम्मीद है, इसलिए किसान अक्टूबर में नया सीजन शुरू होने से पहले अपनी उपज को बाजार में उतार सकते हैं। इसके अतिरिक्त प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में बारिश के कारण मसाले में नमी की मात्रा अधिक होने से हाजिर बाजार में माँग में सुस्ती देखी जा रही है। सरकार द्वारा 1 करोड़ रुपये से अधिक नकद पैसे निकालने पर 2% टैक्स लगाने के फैसले के विरोध में कारोबारियों द्वारा अनिश्चित कालीन हड़ताल के कारण आज गुजरात का बेंचमार्क ऊंझा बाजार बंद है।
धनिया वायदा (सितंबर) की कीमतों को 6,125 रुपये के स्तर पर अड़चन रहने की संभावना है। कैरीओवर स्टॉक के पर्याप्त होने और प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में अच्छी बारिश से किसानों को धनिया का बुवाई क्षेत्रों बढ़ाने के लिए मिले प्रोत्साहन के कारण कीमतों में गिरावट हुई। (शेयर मंथन, 06 सितंबर 2019)

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