शेयर मंथन में खोजें

जीरे में बढ़त, हल्दी की कीमतों में तेजी का रुझान - एसएमसी

हल्दी वायदा (सितंबर) कीमतों में कल बढ़ोतरी हुई है। कीमतों में अभी भी तेजी का रुझान है और कीमतें 8,100 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 8,400 रुपये के स्तर पर पहुँच सकती है।

निजामाबाद बाजार में हल्दी की कीमतें 0.5% कम होकर 7,550 रुपये प्रति 100 किलोग्राम रह गयी हैं। लेकिन घरेलू खरीदारों की ओर से माँग और निर्यात के लिए पूछताछ में बढ़ोतरी के कारण कीमतों को मदद मिल सकती है। आने वाले हफ्तों में हल्दी के निर्यात में तेजी आने की उम्मीद है।
कारोबारियों की ओर से बेहतर माँग के कारण जीरा वायदा (सितंबर) की कीमते कल 20 महीने के उच्चतम स्तर 15,470 रुपये पर पहुँच गयी। कीमतों में 16,000 रुपये तक बढ़त जारी रहने की संभावना है। त्योहारों के मौसम से पहले अपने स्टॉक को भरने के लिए व्यापारियों की ओर से कुछ माँग हुई है, इसलिए प्रमुख मंडी-ऊँझा और राजकोट में कीमतें लगातार पांचवे दिन बढ़ी हैं। ऊँझा में सभी वेराइटी की कीमतों में 500 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। वाणिज्य विभाग के आँकड़ों के अनुसार अप्रैल-मई में जीरा का निर्यात पिछले साल के निर्यात की तुलना में 14% अधिक हुआ है। 2021 में जनवरी-जून के दौरान देश ने पिछले साल की समान अवधि समय के 90,000 टन की तुलना में 1.20 लाख टन से अधिक जीरा निर्यात किया है।
देश भर के व्यापारियों की ओर से मजबूत माँग के कारण धनिया वायदा (सितंबर) की कीमतें तेजी के रुख के साथ 8,600 रुपये के स्तर तक बढ़त दर्ज कर सकती है और कीमतों को 8,300 रुपये के स्तर पर सहारा है। मंडी व्यापारियों को उम्मीद है कि जनवरी तक धनिया की कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है। निर्यात माँग में वृद्धि से कीमतों में तेजी आना तय है। देशभर की मंडियों में कीमतों में औसतन 100-150 रुपये प्रति क्विंटल की उछाल देखी गयी है। (शेयर मंथन, 25 अगस्त 2021)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख