कॉटन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 19,600-19,900 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
विदेशी बाजरों में नरमी के रुझान के कारण कॉटन वायदा (दिसंबर) की कीमतों में कल गिरावट हुई है।
कॉटन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 18,300-18,400 रुपये के स्तर पर पहुँच जाने की संभावना है जबकि कीमतों को 18,100 रुपये के पास सहारा रह सकता है।
कॉटन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 18,400-18,500 रुपये के स्तर पर पहुँच जाने की संभावना है जबकि कीमतों को 18,150 रुपये के पास सहारा रह सकता है।
कॉटन वायदा (दिसंबर) की कीमतें 22,200 रुपये के सहारा स्तर से नीचे टूट गयी हैं और अब कीमतों में 21,800 रुपये की गिरावट हो सकती है।
कमोडिटीज बाजार में तेज गिरावट के बावजूद एमसीएक्स में कॉटन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में तेजी का रुझान बना हुआ है।
एमसीएक्स में कॉटन वायदा (जनवरी) की कीमतों में 20,700 रुपये के स्तर पर सहारे के साथ तेजी का रुझान रहने की संभावना है।
कॉटन वायदा (दिसंबर) की कीमतों में 22,400 रुपये के स्तर पर सहारे के साथ तेजी का रुझान रहने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार के तर्ज पर एमसीएक्स में कॉटन वायदा की कीमतें दो साल के उच्च स्तर 21,650 रुपये पर पहुँच गयी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से सकारात्मक संकेत लेते हुये कॉटन वायदा (दिसंबर) की कीमतें तेजी के रुझान के साथ 20,400 रुपये के स्तर पर पहुँच सकती है।
कॉटन वायदा (दिसंबर) की कीमतें नरमी के रुझान के साथ 19,500-20,500 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती हैं।
कॉटन वायदा (दिसंबर) की कीमतें नरमी के रुझान के साथ 19,680-19,950 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती हैं।
कॉटन वायदा (दिसंबर) की कीमतें नरमी के रुझान के साथ 19,770-19,950 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती हैं।
कॉटन वायदा (अगस्त) की कीमतों को 16,150 रुपये के पास सहारा मिलने की उम्मीद है, जबकि कीमतों में 16,500-16,700 रुपये तक बढ़ोतरी हो सकती है।
हाजिर बाजारों में तेजी के रुझानों पर कॉटन वायदा (अगस्त) की कीमतों के 16,550-16,600 रुपये तक बढ़त दर्ज किये जाने की उम्मीद है।
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मार्च के शुरुआती 3 सप्ताहों में भारतीय शेयर बाजार 8% से ज्यादा टूट चुका है। और यह गिरावट एक ऐसे युद्ध के चलते आयी है, जिसमें हमारा कोई लेना-देना नहीं है।
अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।