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खत्म हुआ ब्याज दरों में कटौती का मौजूदा चक्र, RBI MPC की बैठक में हुए ये निर्णय

नये साल की पहली और चालू वित्त-वर्ष की अंतिम मौद्रिक नीति बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बाजार की उम्मीदों के अनुरूप कोई चौंकाने वाला फैसला नहीं किया। शुक्रवार को समाप्त हुई इस बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो दर (Repo Rate) को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया।

 आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट संकेत दिया कि बीते 1 वर्ष से जारी दरों में नरमी का दौर अब अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका है और आगे नीतिगत दरों में कटौती की गुँजाइश सीमित है।

पिछले एक साल में रेपो दर में कुल 125 आधार अंकों की कटौती के बाद बैंकिंग प्रणाली में ब्याज दरों का पर्याप्त प्रसारण हो चुका है। बैंकों की औसत ऋण दरों में करीब 105 आधार अंकों की कमी इसी का संकेत है। ऐसे में एमपीसी का मुख्य ध्यान अब दरों में और नरमी के बजाय आर्थिक स्थिरता, महँगाई पर नियंत्रण और वृद्धि की रफ्तार बनाये रखने पर है। 

यह नीतिगत बैठक ऐसे समय हुई है, जब एक ओर हालिया बजट से माँग को समर्थन मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते भारत की मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं को मजबूती दे सकते हैं। आरबीआई का आकलन है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और विकास की गति लंबी अवधि तक बनी रह सकती है। महँगाई भले ही नियंत्रित दायरे में हो, लेकिन निकट भविष्य में उसमें ऊपर की ओर हल्का दबाव देखने को मिल सकता है। इन्हीं कारकों को ध्यान में रखते हुए एमपीसी ने संतुलित रुख अपनाया है। 

मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद गवर्नर मल्होत्रा की मुख्य घोषणाएँ

  1. एमपीसी ने रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखा। यह निर्णय आम सहमति से हुआ।
  2. मौद्रिक नीति का रुख उदासीन (न्यूट्रल) बनाये रखने का फैसला लिया गया।
  3. पिछले 1 साल में 125 आधार अंकों की कटौती के बाद दरों में नरमी का मौजूदा चक्र समाप्त हो रहा है।
  4. बैंकों को रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट) को ऋण देने की अनुमति का प्रस्ताव है।
  5. मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) दर 5.5% और स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) दर 5% पर बरकरार है।
  6. वित्त-वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान बढ़ा कर 7.4% किया गया।
  7. अगले वित्त-वर्ष में आर्थिक वृद्धि 6.8% से 7.2% के दायरे में रहने का अनुमान है।
  8. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में महँगाई 4% और दूसरी तिमाही में 4.2% रहने का अनुमान है।
  9. विदेशी मुद्रा भंडार जनवरी के अंत में 723.8 अरब डॉलर पर रहा, जो 11 महीनों की आयात जरूरतों के लिए पर्याप्त है।
  10. अगले कुछ दिनों में जीडीपी और महँगाई के लिए नयी सांख्यिकीय श्रृंखला और नया आधार वर्ष जारी होगा। इससे अर्थव्यवस्था की बेहतर तस्वीर सामने आयेगी।

कोटक महिंद्रा एएमसी के फिक्स्ड इनकम प्रमुख अभिषेक बिसेन ने एमपीसी के निर्णय पर कहा, ‘‘आरबीआई की मौद्रिक नीति बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप रही है। रिजर्व बैंक ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने और मौद्रिक नीति के रुख को उदासीन बनाये रखने का निर्णय लिया है। वित्त-वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के लिए महँगाई का अनुमान हल्का-सा बढ़ाकर 4.1% कर दिया गया है, जो पहले 3.95% था। हालाँकि महँगाई का समग्र परिदृश्य अब भी सहज और नियंत्रण में बना हुआ है। वहीं, वित्त-वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 6.95% किया गया है, जो पहले 6.75% था।”

बिसेन के अनुसार, यूरोपीय संघ के साथ हालिया मुक्त व्यापार समझौते और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जीडीपी वृद्धि से जुड़े जोखिमों में कमी आने की संभावना है। वे कहते हैं, “रिजर्व बैंक आगे भी सक्रिय रुख बनाये रखेगा और प्रणाली में पर्याप्त तरलता (लिक्विडिटी) सुनिश्चित करता रहेगा। हमारा मानना है कि इस मौद्रिक नीति के बाद आरबीआई दरों पर लंबे समय तक विराम की स्थिति में रह सकता है। 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड में करीब 4 आधार अंकों की हल्की बढ़त दर्ज की गयी है और यह फिलहाल लगभग 6.70% के स्तर पर है।’’

यह चालू वित्त-वर्ष के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की छठी एवं अंतिम बैठक थी। वहीं नये साल यानी 2026 में एमपीसी की यह पहली बैठक थी। एमपीसी की अगली बैठक अब अप्रैल में होगी। (शेयर मंथन, 6 फरवरी 2026)

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