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सोना-चाँदी में क्यों आई सुस्ती, क्या अभी खत्म नहीं हुआ दबाव?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चाँदी फिलहाल दबाव में दिखाई दे रहे हैं। डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक तनावों ने इन दोनों की चमक फीकी कर दी है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि जब तक दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं अपने डॉलर भंडार का बड़ा हिस्सा तेल खरीदने में खर्च करती रहेंगी, तब तक सोना और चाँदी में बड़ी तेजी की उम्मीद करना मुश्किल होगा। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कई देशों ने अमेरिकी ट्रेजरी पर निर्भरता कम करके गोल्ड रिजर्व बढ़ाना शुरू किया था, लेकिन अब वही अतिरिक्त डॉलर तेल आयात में खर्च हो रहे हैं। ऐसे में गोल्ड की डिमांड उतनी मजबूत नहीं बन पा रही जितनी पहले दिखाई दे रही थी।

युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव खत्म होने तक कीमती धातुओं में मजबूत तेजी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। पहले सोने के लिए 4900 डॉलर का स्तर बेहद अहम माना जा रहा था, लेकिन अब तकनीकी तस्वीर कमजोर होने के कारण यह स्तर घटकर 4800 डॉलर के आसपास आ गया है। बाजार में अब “लोअर हाई” और “लोअर लो” का पैटर्न बन रहा है, जो कमजोरी का संकेत माना जाता है। भारतीय बाजार यानी एमसीएक्स में भी सोने की चाल मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय डॉलर कीमतों से ही तय हो रही है। रुपये की कमजोरी से कुछ समय तक सपोर्ट जरूर मिला, लेकिन मूल ट्रेंड अभी भी कमजोर ही माना जा रहा है।

फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में तेजी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं होता और डॉलर आधारित कीमतें मजबूत ब्रेकआउट नहीं देतीं, तब तक सोना और चांदी दोनों में सावधानी रखना बेहतर रणनीति हो सकती है।

(शेयर मंथन, 26 मई 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

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