भारतीय शेयर बाजार फिलहाल ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ डर और उम्मीद दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि तकनीकी संकेतों के आधार पर निफ्टी में एक सीमित तेजी या “माइनर बाउंस” देखने को मिल सकता है। हालांकि वे यह भी साफ करते हैं कि यह तेजी अभी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है, क्योंकि बाजार के सामने मौजूद बड़े जोखिम अभी खत्म नहीं हुए हैं। उनके अनुसार 23,300 के आसपास निफ्टी का महत्वपूर्ण सपोर्ट बना हुआ है और जब तक यह स्तर टूटता नहीं है, तब तक बाजार में ऊपर की तरफ हल्की रिकवरी की संभावना बनी रह सकती है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार के मुताबिक 24,000 का स्तर बाजार के लिए सबसे बड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर निफ्टी इस स्तर को पार कर लेता है तो 24,300 से 24,500 तक की तेजी संभव हो सकती है। लेकिन उनका कहना है कि यह पूरा सेटअप केवल तकनीकी संकेतों पर आधारित है। फंडामेंटल स्तर पर अभी भी बाजार के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनमें सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बदलते बयान बाजार की चिंता बढ़ा रहे हैं। कभी युद्ध की धमकी और कभी समझौते की बात निवेशकों को भ्रमित कर रही है। उमेश कुमार का मानना है कि इस समय किसी भी राजनीतिक बयान पर भरोसा करने के बजाय केवल डेटा और बाजार के व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि हालात कभी भी अचानक बदल सकते हैं और इसी वजह से निवेशकों को जरूरत से ज्यादा आशावादी होने से बचना चाहिए।
बैंकिंग सेक्टर को लेकर भी उन्होंने सतर्क रुख अपनाया है। उनका मानना है कि बैंक निफ्टी में 52,750 के आसपास शॉर्ट टर्म बॉटम बन सकता है, लेकिन इसके बावजूद वे बैंकिंग शेयरों में आक्रामक निवेश के पक्ष में नहीं हैं। उनके अनुसार बढ़ती महंगाई और लोन डिफॉल्ट का खतरा आगे चलकर बैंकिंग सेक्टर पर दबाव बना सकता है। यही कारण है कि वे फिलहाल मिडकैप और स्मॉलकैप के चुनिंदा सेक्टर्स में चरणबद्ध निवेश की सलाह दे रहे हैं।
(शेयर मंथन, 27 मई 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)