साल 1986 में स्थापित इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) का मुख्य काम भारतीय रेलवे के लिए फंड जुटाना था। लेकिन अब कंपनी तेजी से अपने बिजनेस मॉडल को बदल रही है।
आईआरएफसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मनोज कुमार दुबे का कहना है कि आईआरएफसी अब सिर्फ रेलवे तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि मेट्रो रेल, रैपिड रेल और रेलवे इकोसिस्टम से जुड़े दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को भी फंड करने की तैयारी में है। आईआरएफसी के CMD मनोज कुमार दुबे ने बताया कि कंपनी को नवरत्न का दर्जा मिलने के बाद उसके बिजनेस विस्तार की दिशा में तेजी आई है। कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में रेलवे इकोसिस्टम में करीब 75 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी और लगभग 35 हजार करोड़ रुपये का डिस्बर्समेंट किया।
कंपनी का लक्ष्य 2030 तक अपने बिजनेस पोर्टफोलियो को 70:30 या 60:40 के अनुपात तक ले जाना है। इसका मतलब होगा कि आने वाले वर्षों में IRFC का 30 से 40 फीसदी बिजनेस रेलवे के बाहर के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से आएगा। खास बात यह है कि इन नए बिजनेस क्षेत्रों में कंपनी को रेलवे की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा मार्जिन मिल रहा है।
आईआरएफसी का मानना है कि भारत में तेजी से बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और शहरी परिवहन परियोजनाओं के लिए भारी फंडिंग की जरूरत होगी। ऐसे में कम लागत पर पूंजी जुटाने की क्षमता कंपनी को बड़ा फायदा दे सकती है। कंपनी का दावा है कि उसका ‘जीरो NPA’ रिकॉर्ड उसे घरेलू और विदेशी बाजारों से सस्ते दर पर फंड जुटाने में मदद करता है।
(शेयर मंथन, 28 मई 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)