बाजार की मौजूदा चाल को सिर्फ तकनीकी संकेतों से समझना पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि इस समय भू-राजनीतिक अनिश्चितता भी एक बड़ा जोखिम बनी हुई है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर केवल बड़ी कंपनियों जैसे रिलायंस, इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक या एलएंडटी तक सीमित नहीं रहता। यदि तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तरों पर रहता है तो इसका असर व्यापक अर्थव्यवस्था, कंपनियों की लागत, मार्जिन और निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। इसलिए मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियां भी इससे पूरी तरह अछूती नहीं रह सकतीं।
फिलहाल बाजार ऐसी स्थिति में पहुंच गया है जहां एक तरफ तेजी की उम्मीद बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ अनिश्चितता ने उस उम्मीद को कमजोर भी किया है। सितंबर के बाद अक्टूबर से कंपनियों के तिमाही नतीजों का दौर शुरू होगा और मजबूत नतीजों की उम्मीद बाजार को सहारा दे सकती है। लेकिन युद्ध या पश्चिम एशिया से जुड़ी स्थिति दोबारा बिगड़ती है तो उसके प्रभाव को पहले से किसी तकनीकी डेटा में शामिल करना मुश्किल होगा। यही वजह है कि मौजूदा समय में अत्यधिक आक्रामक होने के बजाय 'वेट एंड वॉच' की रणनीति बेहतर लगती है। पोर्टफोलियो में समय-समय पर चर्निंग और बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टरों की ओर रोटेशन करना निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
(शेयर मंथन, 04 सितंबर 2026)
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