शेयर मंथन में खोजें

एलऐंडटी (L&T) के नतीजों से शेयर भाव लुढ़का

देश की प्रमुख इंजीनियरिंग और निर्माण कंपनी लार्सन ऐंड टुब्रो (Larsen & Toubro) के तीसरी तिमाही के कारोबारी नतीजे बाजार की उम्मीदों से कमजोर रहने के कारण सोमवार को इसके शेयर बुरी तरह टूटे।

इसका कंसोलिडेटेड तिमाही मुनाफा 867 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 796 करोड़ रुपये की तुलना में 8.77% ज्यादा है। इस दौरान कंपनी की कुल आय 21,732 करोड़ रुपये से 9.73% बढ़ कर 23,847 करोड़ रुपये हो गयी। वहीं इसका स्टैंडएलोन तिमाही मुनाफा इस दौरान 1,241 करोड़ रुपये से घट कर 1,060 करोड़ रुपये रह गया। 

कंपनी का कंसोलिडेटेड ऑर्डर सालाना आधार पर 17% बढ़ कर दिसंबर 2014 के अंत में 2,22,579 करोड़ रुपये का रहा। इसने उम्मीद जतायी है कि साल 2014-15 में इसके ऑर्डर बुक में 15-20% की वृद्धि होगी, जबकि पहले इसने नये ठेकों में 20% वृद्धि का अनुमान सामने रखा था। इस तरह कंपनी नये ठेके मिलने की गति को लेकर पहले की तुलना में कुछ कम आश्वस्त लग रही है। 

इसका मार्जिन घटने के कारण बाजार में चिंता बढ़ी है। बिजली (पावर) श्रेणी में कंपनी का एबिटा मार्जिन 22.2% से घट कर 19.7% रह गया है। इसी तरह बुनियादी ढाँचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) श्रेणी में इसका एबिटा मार्जिन 10.4% की तुलना में केवल 9% रह गया। हाइड्रोकार्बन श्रेणी में तो इसका मार्जिन नकारात्मक हो गया है। पिछले बार के 1.6% मार्जिन की तुलना में इस तिमाही में मार्जिन -4.8% दर्ज किया गया। 

एलऐंडटी का शेयर आज सुबह से ही दबाव में था, मगर नतीजे सामने आने के बाद यह और बुरी तरह से टूटा। नतीजों से पहले यह 1620-1630 के दायरे में चल रहा था, मगर 3 बजने से कुछ मिनट पहले नतीजों के सामने आने के बाद यह 1550 रुपये तक फिसल गया। बीएसई में यह कारोबार बंद होने पर 111.35 रुपये या 6.61% की गिरावट के साथ 1573 रुपये पर रहा। (शेयर मंथन, 09 फरवरी 2015)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख