भारतीय शेयर बाजार में हाल के महीनों में आई सुस्ती को लेकर निवेशकों के बीच यह धारणा बन गई है कि वैश्विक तनाव और टैरिफ विवाद खत्म होते ही बाजार फिर से तेज रफ्तार पकड़ लेगा।
हालांकि बाजार विशेषज्ञ सुनील सुब्रमण्यम का मानना है कि तस्वीर इतनी सरल नहीं है। उनके अनुसार, बाजार पर सिर्फ युद्ध या टैरिफ का असर नहीं पड़ा है, बल्कि कई अन्य संरचनात्मक कारण भी मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) सितंबर 2024 से भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं, जबकि उस समय न तो कोई बड़ा युद्ध था और न ही टैरिफ विवाद। इसके पीछे प्रमुख कारण भारतीय शेयरों का ऊंचा वैल्यूएशन और एआई आधारित वैश्विक निवेश थीम में भारत की अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति रही है। विदेशी निवेशकों ने चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे बाजारों को प्राथमिकता दी, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी विकास की संभावनाएं अधिक दिखाई दीं।
सुनील का कहना है कि यदि ईरान-अमेरिका विवाद सुलझ भी जाता है और कच्चे तेल की कीमतों में कमी आती है, तब भी बाजार में कोई "रनअवे रैली" देखने को नहीं मिलेगी। इससे बाजार को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन लंबी और मजबूत तेजी के लिए विदेशी निवेशकों की वापसी और भारत की विकास संभावनाओं पर नया भरोसा बनना जरूरी होगा। तब तक बाजार सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार करता रह सकता है।
(शेयर मंथन, 01 जून 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)