अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
बाजार विशेषज्ञ सुनील सुब्रमण्यम का कहना है कि इस समय बाजार किसी बयान से ज्यादा तेल की कीमतों पर नजर रख रहा है, क्योंकि यही वैश्विक आर्थिक जोखिम का सबसे बड़ा संकेतक बन गया है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, ईरान से जुड़े घटनाक्रम और सऊदी अरब-यमन के बीच बढ़ते तनाव ने तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है। यही वजह है कि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के करीब पहुंचने के बाद भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।
तेल की कीमतों में उछाल का असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर सबसे अधिक पड़ता है। महंगा कच्चा तेल आयात बिल बढ़ाता है, जिससे महंगाई पर दबाव बनता है। यदि खाद्य महंगाई भी बढ़ती है तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए ब्याज दरों में राहत देना मुश्किल हो सकता है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशकों का रुख भी सतर्क हो जाता है और घरेलू निवेशक भी नई खरीदारी से बचने लगते हैं। यही कारण है कि बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है और निवेशक आने वाले महीनों में वैश्विक घटनाओं और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर नजर बनाए हुए हैं।
(शेयर मंथन, 30 जुलाई 2026)
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