आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े वैश्विक घटनाक्रमों का असर भारतीय आईटी शेयरों पर लगातार देखने को मिल रहा है।
सेठी फिनमार्ट के एमडी विकास सेठी का कहना है कि इससे पूरे भारतीय शेयर बाजार की तस्वीर खराब नहीं होती। उनके अनुसार, जब अमेरिकी बाजार में AI और टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली होती है, तो उसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी पड़ता है क्योंकि उनका कारोबार वैश्विक बाजार से जुड़ा है। आईटी शेयरों का निफ्टी में अच्छा-खासा वेटेज होने के कारण कई बार ऐसा लगता है कि पूरा बाजार कमजोर है, जबकि वास्तविकता में ब्रॉडर मार्केट और कई अन्य सेक्टर बेहतर प्रदर्शन कर रहे होते हैं।
भारतीय आईटी कंपनियों का बिजनेस मॉडल अमेरिकी AI कंपनियों से अलग है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि Infosys की हालिया वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी के चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने भी स्पष्ट कहा कि AI को केवल कारोबार के लिए खतरे के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़े अवसर के रूप में देखना चाहिए। कई भारतीय आईटी कंपनियां पहले ही OpenAI और Anthropic जैसी वैश्विक AI कंपनियों के साथ साझेदारी कर चुकी हैं और AI आधारित सेवाओं से उन्हें धीरे-धीरे नया कारोबार भी मिलने लगा है। ऐसे में आने वाले वर्षों में AI भारतीय आईटी कंपनियों की ग्रोथ का नया इंजन बन सकता है।
आईटी सेक्टर में हालिया गिरावट के बाद वैल्यूएशन काफी आकर्षक हो चुके हैं। इसलिए जिन निवेशकों का नजरिया दो से तीन साल का है, उन्हें इस सेक्टर से घबराने की जरूरत नहीं है। उनका सुझाव है कि आईटी शेयरों में एकमुश्त निवेश करने के बजाय गिरावट आने पर चरणबद्ध तरीके से निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।
हालांकि, निवेश के लिहाज से विशेषज्ञ की पहली पसंद अभी भी बैंकिंग और NBFC सेक्टर हैं। उनका कहना है कि हाल के दिनों में बैंकिंग शेयरों में आई गिरावट के बाद फिर से मजबूती लौट रही है। मानसून की स्थिति में सुधार, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, रुपये की मजबूती और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया नीतिगत घोषणाओं से बैंकिंग सेक्टर का आउटलुक और बेहतर हुआ है। इसलिए इन स्तरों पर बैंकिंग शेयरों में निवेश की संभावनाएं ज्यादा मजबूत दिखाई देती हैं।
बड़े बैंकों के साथ-साथ कुछ चुनिंदा मिड-साइज बैंक और NBFC भी निवेशकों के लिए अच्छे अवसर पेश कर सकते हैं। उन्होंने RBL Bank, Federal Bank, Shriram Finance और Sammaan Capital जैसे शेयरों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कंपनियों में प्रबंधन स्तर पर सकारात्मक बदलाव और बड़े संस्थागत निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी भविष्य में बेहतर प्रदर्शन का आधार बन सकती है। उनका मानना है कि ब्याज दरों में फिलहाल बढ़ोतरी की संभावना कम है और यदि आगे चलकर महंगाई नियंत्रित रहती है तो भविष्य में दरों में कटौती भी देखने को मिल सकती है, जिसका सबसे बड़ा फायदा बैंकिंग और रेट-सेंसिटिव सेक्टर्स को मिलेगा।
(शेयर मंथन, 02 जुलाई 2026)
(आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)