बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या स्मॉलकैप और दूसरे शेयरों में अब पैसा कमाने का मौका मिलेगा या बाजार इसी तरह परेशान करता रहेगा।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि अगर बाजार को 4 से 6 महीने के साइकिल के नजरिए से देखा जाए तो मौजूदा स्थिति को स्थायी नहीं माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक बाजार निवेशकों को पैसा बनाने और घर ले जाने का मौका देगा, लेकिन अभी युद्ध, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और ब्याज दरों जैसे कारणों से स्थितियां कुछ ज्यादा कठिन बनी हुई हैं।
विशेषज्ञ का कहना है कि मौजूदा दौर में कई लोग देश की अर्निंग्स ग्रोथ और GDP ग्रोथ को नजरअंदाज कर रहे हैं। जबकि बाजार की वैल्यूएशन पहले के मुकाबले बदली है। उनके मुताबिक दिसंबर तिमाही से अर्निंग्स में सुधार शुरू हुआ है और इसी वजह से निफ्टी अब पहले की तरह 20 से ज्यादा P/E पर नहीं मिल रहा, बल्कि करीब 19 P/E के स्तर पर उपलब्ध है। इसलिए केवल इस आधार पर बाजार को कमजोर मानना सही नहीं होगा कि लंबे समय से नया हाई नहीं बना है। निवेशकों को यह समझने की जरूरत है कि बाजार में किसी साइकिल का विस्तार क्यों हुआ है और उसके पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।
स्मॉलकैप को लेकर भी विशेषज्ञ ने कहा कि पूरे सेक्टर या इंडेक्स को एक नजर से देखने के बजाय शेयरों के फंडामेंटल को समझना जरूरी है। स्मॉलकैप इंडेक्स चलने के बावजूद हर शेयर में तेजी नहीं आई और कई शेयरों में गिरावट भी देखने को मिली है। इसकी वजह यह है कि पिछली साइकिल में अच्छा प्रदर्शन करने वाली कुछ कंपनियां इस समय हाई क्रूड प्राइस, गैस की ऊंची कीमतों, ब्याज दरों और फंडिंग कॉस्ट जैसी चुनौतियों से प्रभावित हैं। इसलिए कुछ कंपनियों की अर्निंग्स साइकिल को सामान्य होने में समय लग सकता है।
विशेषज्ञ ने यह भी स्वीकार किया कि उनके अपने पोर्टफोलियो में भी कुछ ऐसे शेयर हैं जो पिछली साइकिल में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद इस समय नहीं चल पाए हैं। हालांकि उनका मानना है कि किसी कंपनी या शेयर का कुछ समय के लिए आउट ऑफ फॉर्म होना यह साबित नहीं करता कि उसकी पूरी कहानी खत्म हो गई है। उनके मुताबिक, अगर कंपनी की गुणवत्ता और फंडामेंटल मजबूत हैं तो परिस्थितियां बदलने पर वह दोबारा प्रदर्शन कर सकती है। इसलिए निवेशकों को यह देखना चाहिए कि मौजूदा समय में किन शेयरों और सेक्टरों में कमाई की संभावना बन रही है और उसी हिसाब से पोर्टफोलियो को एडजस्ट करना चाहिए।
मौजूदा रेंज-बाउंड बाजार में विशेषज्ञ ने रणनीति के तौर पर समय-समय पर प्रॉफिट बुकिंग और पोर्टफोलियो की रीपोजिशनिंग पर जोर दिया। उनका कहना है कि जब बाजार सीमित दायरे में घूम रहा हो तो निवेशकों को सिर्फ बाजार के चलने का इंतजार करने के बजाय अपने पोर्टफोलियो पर काम करते रहना चाहिए। जिस दिन बाजार में व्यापक तेजी लौटेगी, उस समय सही जगह पर मौजूद निवेशकों को अल्फा हासिल करने का मौका मिल सकता है। इसलिए स्मॉलकैप में हर शेयर के तेजी से बढ़ने की उम्मीद करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल, अर्निंग्स और मौजूदा साइकिल के असर को समझना ज्यादा जरूरी है।
(शेयर मंथन, 21 सितंबर 2026)
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