शेयर मंथन में खोजें

एचडीएफसी म्यूचुअल फंड ने कहाँ की खरीदारी और क्या बेचा नवंबर में

एचडीएफसी म्यूचुअल फंड ने नवंबर महीने के दौरान अपने इक्विटी फंडों के पोर्टफोलिओ में कई शेयरों का हिस्सा बढ़ाया, जबकि कई शेयरों में बिकवाली करके उनमें हिस्सेदारी कम की।


एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार इस म्यूचुअल फंड घराने की इक्विटी योजनाओं में अक्टूबर 2017 के आँकड़ों के अनुसार रिलायंस निप्पॉन लाइफ असेट के 11.90 लाख शेयर थे, जो नवंबर 2017 के आँकड़ों में बढ़ कर 1.45 करोड़ हो गये। इस तरह नवंबर में इस फंड घराने ने रिलायंस निप्पॉन लाइफ असेट के 1.23 करोड़ से अधिक शेयरों की खरीदारी की है। इसी तरह इडेलवाइज फाइनेंशियल, एनटीपीसी, विजया बैंक, टीवी18, गुजरात पीपावाव, आईडीएफसी बैंक, टाटा मोटर्स, एनएचपीसी, ओरिएंट सीमेंट ऐसे प्रमुख नाम हैं, जहाँ इस म्यूचुअल फंड ने नवंबर में खरीदारी की है।
दूसरी ओर शेयरों की संख्या के लिहाज से इसने सबसे ज्यादा बिकवाली आईसीआईसीआई बैंक में की है। इसने अक्टूबर के मुकाबले नवंबर में आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों की संख्या 25.97 करोड़ से घटा कर 24.16 करोड़ कर ली है। यानी इसने आईसीआईसीआई बैंक ने 1.81 करोड़ से अधिक सेयर बेच दिये। इसके अलावा जिन अन्य प्रमुख शेयरों में इसने बिकवाली की है, उनके नाम हैं अदाणी पोर्ट्स, टाटा स्टील, एचबीएल पावर, एसबीआई, क्लपतरु पावर, जेएसडब्ल्यू एनर्जी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, रिलायस कम्युनिकेशंस और हैवेल्स इंडिया। (शेयर मंथन, 26 दिसंबर 2017)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख