सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (CMPDI) के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर बाजार में दिलचस्पी बढ़ रही है, खासकर इसलिए क्योंकि यह एक मिनी रत्न पीएसयू कंपनी है और Coal India Limited की सहायक इकाई के रूप में काम करती है।
लगभग 1,800 करोड़ रुपये के इस आईपीओ की खास बात यह है कि यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है, यानी इससे मिलने वाली राशि सीधे प्रमोटर को जाएगी, कंपनी को नहीं। CMPDI का मुख्य कार्य माइनिंग सेक्टर में कंसल्टेंसी सेवाएं देना है, जिसमें कोयला ब्लॉक्स की पहचान, एक्सप्लोरेशन, माइन प्लानिंग, डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), पर्यावरण मूल्यांकन, माइन ऑपरेशन सपोर्ट और अंत में माइन क्लोजर तक की पूरी वैल्यू चेन शामिल है। सरल शब्दों में, यह कंपनी माइनिंग के पूरे जीवनचक्र शुरुआत से अंत तक, अपनी सेवाएं प्रदान करती है।
कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा अब भी कोल इंडिया से आता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसका क्लाइंट बेस तेजी से बढ़ा है। अब कंपनी सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को सेवाएं दे रही है, जिनमें खनन और ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी कंपनियां शामिल हैं। खास बात यह है कि पिछले तीन सालों में कंपनी के रेवेन्यू, EBITDA और मुनाफे में मजबूत वृद्धि देखी गई है, जिसका कारण कोल सेक्टर में बढ़ती गतिविधियां, सरकार की एक्सप्लोरेशन पर बढ़ती फोकस और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट है। साथ ही, एनवायरमेंटल सर्विसेज और जियोमैटिक्स जैसे नए वर्टिकल्स भी तेजी से उभर रहे हैं, जो कंपनी के लिए अतिरिक्त ग्रोथ के अवसर बना रहे हैं।
CMPDI की सबसे बड़ी ताकत इसका 50 साल का अनुभव और विशाल डेटा बेस है, जो इसे न सिर्फ भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक मजबूत कंसल्टेंसी प्लेयर बनाता है। माइनिंग सेक्टर में इस स्तर की इंटीग्रेटेड सेवाएं देने वाली कंपनियां बहुत कम हैं, जिससे इसे एक यूनिक पोजिशन मिलती है। हालांकि, लिस्टेड स्पेस में इसका सीधा-सीधा कोई तुलनात्मक प्रतिस्पर्धी नहीं है, इसलिए वैल्यूएशन तय करने के लिए इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी कंपनियों जैसे Engineers India Limited और RITES Limited के कंसल्टिंग बिजनेस से तुलना की गई है।
आने वाले समय में कंपनी की रणनीति केवल कोल सेक्टर तक सीमित नहीं रहने की है, बल्कि क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे उभरते क्षेत्रों में विस्तार करने की है। इसके अलावा, डिजिटल टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाकर अपने कामकाज को अधिक कुशल बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कंपनी अपनी उपस्थिति बढ़ाने की योजना बना रही है और अगले 5 वर्षों में कुल रेवेन्यू का कम से कम 5% विदेशी बाजारों से लाने का लक्ष्य रखा गया है।
सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट का यह आईपीओ उन निवेशकों के लिए आकर्षक हो सकता है जो पीएसयू सेक्टर में स्थिर और लंबे समय के अवसर तलाश रहे हैं। हालांकि, चूंकि यह पूरी तरह OFS है और कंपनी को सीधे कोई फंड नहीं मिलेगा, इसलिए निवेशकों को इसके बिजनेस मॉडल, ग्रोथ संभावनाओं और वैल्यूएशन को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लेना चाहिए।
(शेयर मंथन, 20 मार्च 2026)
(आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)