शेयर मंथन में खोजें

बजट के झटके से जल्द उबर जायेगा बाजार, निकट समय में कर सकता है कंसोलिडेट : सिद्धार्थ खेमका, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services Ltd) में रीटेल रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक बुधवार (24 जुलाई) को निफ्टी में बजट के बाद का प्रभाव देखने को मिला और ये पूरे कारोबारी सत्र के दौरान नकारात्मक दायरे में कारोबार करता रहा। ये सूचकांक 66 अंकों के नुकसान के साथ 24415 के स्तर पर बंद हुआ।

अस्थिरता सूचकांक इंडिया विक्स भी 7.8% की गिरावट के बाद 11.76 के दायरे में आ गया, जो घटती भागीदारी का संकेत है। क्षेत्रवार आज मिलाजुला रुख रहा और बजट राहत  के उपायों की घोषणा के बाद ऑयल ऐंड गैस, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फार्मा और रियल्टी क्षेत्रों में खरीदारी देखने को मिली।  

छोटी अवधि और लंबी अवधि के पूँजीगत लाभ कर में अप्रत्याशित वृद्धि से निवेशकों का मूड खराब होने के बाद बाजार में गिरावट देखने को मिली। बाजार के नये उच्च स्तरों पर होने के साथ ही बजट ने नाजुक वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच भारत की वृहत आर्थिक स्थिति को मजबूत किया। 

हमारा अनुमान है कि बाजार का ध्यान जल्द ही बजट के प्रभाव को नजरअंदाज कर कंपनियों की आय वृद्धि की दिशा पर आ जायेगा, जो वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही में हमारे अनुमान से कम रहा है। अत: हमें उम्मीद है कि बाजार निकट समय में कंसोलिडेट कर सकता है।  

(शेयर मंथन, 24 जुलाई 2024) 

(आप भी किसी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख