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कयामत की एक तारीख पार, दूसरी भी निकल जायेगी

राजीव रंजन झा : पिछले हफ्ते बुधवार 19 दिसंबर की सुबह बाजार का रुझान कुछ और दिख रहा था, शुक्रवार का दिन पूरा होते-होते कुछ और नजर आने लगा।

मंगलवार दोपहर बाद की चाल से ऐसा लग रहा था कि बाजार में अगली चाल की दिशा ऊपर की है। लेकिन गुरुवार और शुक्रवार को बाजार गिरता नजर आया। इसने नयी मजबूत चाल के शुरुआती संकेत तो स्पष्ट रूप से दे दिये हैं। बुधवार को लग रहा था कि बाजार ने नयी मजबूत चाल के शुरुआती संकेत तो दे दिये हैं। बुधवार को बाजार कुछ ऊपर चला भी। लेकिन बुधवार को 5939 तक जाने के बाद यह अगले दिन गुरुवार को यह स्तर पार नहीं कर पाया और वैश्विक बाजारों के ढीले रुझान के साथ नीचे फिसल गया।
हालाँकि गुरुवार को भी निफ्टी ने ज्यादा खतरे के संकेत नहीं दिये। यह दिन के निचले स्तर से सँभला था, जो नीचे के भावों पर खरीदारी का सहारा मिलने का संकेत था। लेकिन शुक्रवार को वैश्विक बाजारों में दबाव बढ़ने का असर दिखा और पूरे दिन निफ्टी फिसलता ही रहा। आखिरी घंटे में दबाव कुछ ज्यादा ही बढ़ गया। इस कमजोरी में निफ्टी 5842 तक गिरने के बाद अंत में इसके पास ही 5848 पर रहा।
शुक्रवार की इस गिरावट के बावजूद मैं बुधवार की वह बात नहीं काट रहा कि “जनवरी का पहला-दूसरा हफ्ता बाजार के लिए कुछ जोश भरा हो तो इसमें चौंकने वाली कोई बात नहीं होगी। लेकिन इस जोश के बीच आप जरा सावधान रहेंगे तो बेहतर होगा।”
गुरुवार और शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार फिसला इस वजह से कि अमेरिका में फिस्कल क्लिफ का समाधान अब तक नहीं निकलने से दुनिया भर के बाजारों में बेचैनी बढ़ रही है। लेकिन न 21 दिसंबर को माया सभ्यता के कैलेंडर के आधार पर की गयी भविष्यवाणियों के मुताबिक कयामत आयी, न ही 31 दिसंबर 2012 को कोई कयामत आने वाली है। मुझे और आपको फिस्कल क्लिफ का विशेषज्ञ बनने की कोई जरूरत नहीं। अमेरिकी सरकार को अपने देश के लोगों से कितना कर वसूलना चाहिए, इस पर हम क्यों माथापच्ची करें! ये जिनकी समस्या है, वे खुद ही इससे निपट लेंगे। ऐसा करने में उन्हें कुछ दिन या कुछ हफ्ते ज्यादा लग जायें तो इससे कयामत नहीं आने वाली।
बीते हफ्ते के उतार-चढ़ाव के बाद निफ्टी के तात्कालिक समर्थन स्तर मोटे तौर पर 5800-5850 के दायरे में दिख रहे हैं। मंगलवार 18 दिसंबर को आरबीआई के फैसले (अनिर्णय कहना बेहतर होगा) के बाद की घबराहट में निफ्टी ने 5823 का निचला स्तर छुआ था। साथ में जरा याद करें कि 5 अक्टूबर को (अरे, वही फ्लैश क्रैश या अचानक बड़ी गिरावट वाले दिन) निफ्टी ने 5815 पर एक ऊपरी शिखर बनाया था। और अब 20 दिनों का सिंपल मूविंग एवरेज (एसएमए) 5853 पर है। इसके अलावा, निफ्टी ने 20 नवंबर की तलहटी 5548 से 11 दिसंबर के ताजा शिखर 5965 तक 417 अंक की जो उछाल भरी थी, उसकी 38.2% वापसी का स्तर 5806 पर है।
लेकिन अगर वैश्विक बाजारों में घबराहट बढ़ी और निफ्टी 5800-5850 के दायरे से नीचे फिसलने लगा तो कहाँ नजर जायेगी? करीब 100 अंक नीचे 5720-5750 के दायरे पर। अभी 50 एसएमए 5741 पर है। साथ में जून 2012 से चल रही रुझान पट्टी (ट्रेंड चैनल) की निचली रेखा अभी तो 5710 के पास है, लेकिन 31 दिसंबर तक 5740 के पास आ जायेगी क्योंकि यह हर दिन ऊपर चढ़ रही है। अगर यह रेखा पक्के तौर पर कटे, तभी ज्यादा चिंता करने की जरूरत होगी। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक दबाव के मौकों को निचले स्तरों पर खरीदारी के लिए इस्तेमाल करने की रणनीति पर चलते रहें, यही बेहतर है। Rajeev Ranjan Jha
(शेयर मंथन, 24 दिसंबर 2012)

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