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जियोपॉलिटिकल तनाव में गोल्ड-सिल्वर नहीं, ऑयल क्यों बन रहा असली बैरोमीटर?

वैश्विक भूराजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) तनाव के दौर में आम तौर पर निवेशक सोना और चाँदी को सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में इसका असर इन धातुओं की कीमतों में उतना स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि हाल के समय में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला है, जो यह संकेत देता है कि इस युद्ध या तनाव का सबसे सीधा प्रभाव ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। इसलिए इस बार जियोपॉलिटिकल स्थिति को समझने के लिए सोना-चाँदी के बजाय तेल की कीमतों को ज्यादा ध्यान से देखना जरूरी माना जा रहा है। जहाँ तक सोने और चाँदी की बात है, दोनों धातुएँ फिलहाल एक सीमित दायरे (रेंज बाउंड) में कारोबार करती दिख रही हैं। अक्टूबर से अब तक सोने की कीमतों में एक संकरे ट्रेंड चैनल के भीतर ही उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बीच-बीच में कुछ तेज उछाल और गिरावट जरूर आयी, लेकिन व्यापक रुझान (ट्रेंड) में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा।

सोने के मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जैसे-जैसे कीमतें नीचे आती हैं, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक खरीदारी के लिए आगे आ जाते हैं। इसका मतलब है कि सोने में एक मजबूत संरचनात्मक माँग बनी रहती है, जो कीमतों को बहुत ज्यादा नीचे जाने से रोकती है। शोमेश के अनुसार सोने में बड़ी तेजी के लिए फिलहाल कोई मजबूत संकेत (ट्रिगर) नजर नहीं आ रहा है। माना जा रहा है कि करीब 5400–5500 डॉलर के ऊपर ही बड़ी खरीदारी देखने को मिल सकती है। इसके नीचे बाजार इंतजार की रणनीति अपनाये हुए है और यदि कीमतें गिरती हैं तो केंद्रीय बैंक और बड़े निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी कर सकते हैं।

चाँदी का रुझान सोने की तुलना में ज्यादा अस्थिर माना जा रहा है। फिलहाल चाँदी का वैश्विक भाव लगभग 84 डॉलर के आस-पास चल रहा है और इसमें 70 से 97 डॉलर के दायरे में उतार-चढ़ाव की संभावना दिख रही है। इसका भाव 97 डॉलर के ऊपर जाने के लिए किसी मजबूत संकेत की जरूरत होगी। अगर वैश्विक व्यापार से जुड़ी समस्याएँ या टैरिफ संबंधी तनाव बढ़ते हैं, तभी इसमें नयी तेजी देखने को मिल सकती है।

कुल मिला कर, मौजूदा स्थिति में सोना और चाँदी दोनों ही पहले की तेज बढ़त के बाद एक तरह के संतुलन या कंसोलिडेशन के दौर में हैं। आने वाले समय में इनमें या तो कुछ समय तक सीमित दायरे में कारोबार जारी रह सकता है या फिर हल्की गिरावट के साथ कीमतें संतुलित हो सकती हैं। सोने में लंबी अवधि की माँग बनी रहने की संभावना है, जबकि चाँदी के लिए बाजार को नये संकेत का इंतजार रहेगा।

शोमेश कुमार से इस सवाल-जवाब का वीडियो आप यहाँ देख सकते हैं -

(शेयर मंथन, 10 मार्च 2026)

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