अंतरिम बजट : जो नहीं मिला उसी को मुकद्दर समझ लिया
राजीव रंजन झा
कल सुबह मैंने लिखा था कि सरकार इस अंतरिम बजट में ऐसा कुछ नहीं दे सकेगी जो बाजार के उत्साह को एकदम से बढ़ा दे। और इसीलिए मेरी सलाह थी कि ज्यादा उम्मीदें ना ही लगायें तो अच्छा है। लेकिन बाजार ने उम्मीदें लगायी थीं, काफी दिनों से लगा रखी थी और जब ये उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं, तो बाजार ने जबरदस्त निराशा भी दिखा दी। उद्योग जगत ने अपने सुर को थोड़ा बदला, कहने लगा कि हमने तो ज्यादा उम्मीदें रखी ही नहीं थीं, क्योंकि पता था कि यह केवल लेखानुदान (वोट ऑन एकाउंट) है। लेकिन हकीकत यही है कि उद्योग जगत ने अपनी मांगों की फेहरिश्त भी रखी और उम्मीदें भी लगायीं। आपको अपनी याददाश्त का भरोसा ही काफी होगा, अखबारों के पन्ने पलटने की जरूरत नहीं है इसके लिए!
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अंतरिम बजट ने भले ही उद्योग जगत और शेयर बाजार को कोई नयी राहत नहीं दी हो, लेकिन उद्योग संगठन फिक्की ने इसमें भविष्य के संकेत देख कर ही संतोष कर लिया है। फिक्की के अध्यक्ष हर्षपति सिंघानिया ने अंतरिम बजट के बारे में कहा है कि इस अंतरिम बजट ने अगली सरकार के लिए दिशा तय कर दी है और एक साफ संकेत दिया है कि आम चुनाव के बाद के महीनों में कौन-से उठाने की जरूरत होगी। सिंघानिया ने कहा है कि इस अंतरिम बजट ने देश की विकास दर को फिर से तेज करने पर जोर दिया है।