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चालू वित्त वर्ष 2024-25 में जीडीपी वृद्धि 6.3% रहने का अनुमान- एसबीआई रिसर्च

भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान जीडीपी की वृद्धि दर 6.3% रहने का अनुमान जताया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के लिए अनुमानित जीडीपी वृद्धि 6.2% से 6.3% के बीच हो सकती है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के अनुसार, 2024-25 के लिए ‘वास्तविक’ और ‘सांकेतिक’ जीडीपी वृद्धि दर क्रमशः 6.4% और 9.7% रह सकती है।

शेयर बाजार में सबसे ज्यादा पिटे मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक, रिकॉर्ड हाई से 22% टूटा स्मॉलकैप

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से लहुलुहान बाजार में लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक सभी औंधे मुंह गिर रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा पिटायी स्मॉलकैप और मिडपैक सूचकांक में देखने को मिली है।

भारतीय बाजार की मजबूती बयां कर रही विदेशी निवेशकों की बिकवाली : निर्मला सीतारमण

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली की वजह से भारतीय शेयर बाजार को संभलने का मौका नहीं मिल रहा है। बाजार में लगातार 9 सत्रों से गिरावट देखने को मिल रही है। इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों को अच्छा प्रतिफल मिला है। इसलिए इधार बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिल रही है। 

आरबीआई ने न्यू इंडिया को ऑपरेटिव बैंक पर लगायी रोक, ग्राहकों का जमा सुरक्षित

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में 122 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मिलने के बाद वित्तीय लेनदेन पर रोक लगा दी है। बैंक अब न तो लोन दे सकता है, न जमा स्वीकार कर सकता है और न ग्राहक इस बैंक में जमा अपना पैसा निकाल सकते हैं। दरअसल आरबीआई का कहना है कि बैंक की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए इस तरह के सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं।

2024-25 में आये आईपीओ भी बाजार की बिकवाली से बच नहीं सके

आजकल शेयर बाजार के सितारे गर्दिश में नजर आ रहे हैं। एक तरफ बाजार में पहले से सूचीबद्ध दिग्गत शेयर खस्ताहाल हैं, वहीं हाल के दिनों में आये प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) का हाल तो और भी बुरा है। ज्यादातर लाल निशान में ट्रेड कर रहे हैं, तो कुछ के दाम लिस्टिंग भाव से आधे रह गये हैं।

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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