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एक्सपर्ट से जानें किसी स्टॉक का बॉटम बना या नहीं, अर्ली एंट्री कैसे पहचानें?

निवेशकों का यह सवाल सबसे आम और सबसे कठिन भी है कि किसी स्टॉक का बॉटम बन चुका है या नहीं, और अगर बन गया है तो अर्ली एंट्री कैसे ली जाये।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि जब कोई स्टॉक ऑल-टाइम हाई से गिरना शुरू करता है, तो अक्सर निवेशक जल्दीबाजी में बॉटम पकड़ने की कोशिश करते हैं। लेकिन गिरते बाजार में सबसे बड़ा धोखा यही होता है कि हर नया सपोर्ट टूटता चला जाता है। जैसे-जैसे भाव गिरते हैं, नए-नए लेवल बताए जाते हैं, लेकिन असल में किसी को भी सही बॉटम नहीं पता होता। इसलिए केवल चार्ट देखकर बॉटम ढूंढना अक्सर नुकसानदेह साबित होता है। बॉटम को समझने का एक ज्यादा व्यवहारिक तरीका है वैल्यूएशन से शुरुआत करना। यह देखना जरूरी है कि अगले एक-दो साल में उस सेक्टर और उस कंपनी की कमाई की संभावना कैसी है। अगर वैल्यूएशन इस स्तर पर आकर्षक लगने लगें और यह समझ में आए कि यहां से डाउनसाइड अब सीमित हो सकता है—मान लीजिए 10-20% या 25% तो वहां से स्टैगर्ड बाइंग की रणनीति अपनाई जा सकती है। फिर भी यह याद रखना जरूरी है कि गिरते बाजार में रिस्क हमेशा ऊंचा रहता है।

अगर बॉटम बनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी हो, तो कुछ टेक्निकल संकेत मदद कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, बॉटम के बाद कीमतें 20 DMA या 50 DMA के ऊपर टिकने लगें, या कोई राउंडिंग बॉटम जैसा पैटर्न बनने लगे। इसके अलावा, अगर गिरावट के बाद स्टॉक कम से कम 38% का रिट्रेसमेंट दिखा दे, तो यह संकेत हो सकता है कि बिकवाली का दबाव अब कम हो रहा है। ये सारे संकेत मिलकर सिर्फ यह बताते हैं कि बॉटम बनने की संभावना बढ़ रही है, पक्का दावा नहीं। सबसे जरूरी बात यह है कि अगर इन पैरामीटर्स के आधार पर कोई व्यू लिया भी जाए, तो उसके साथ रिस्क मैनेजमेंट तय करना अनिवार्य है। यह साफ होना चाहिए कि अगर स्टॉक किसी खास स्तर के नीचे जाता है, तो यह माना जाएगा कि बॉटम की थ्योरी गलत साबित हो रही है। बॉटम मानकर खरीद लेने के बाद आंख बंद करके बैठ जाना सबसे बड़ी गलती होती है।


(शेयर मंथन, 03 जनवरी 2026)

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