हाल ही में यूनियन बैंक के तिमाही नतीजों के बाद शेयर में करीब 9% की गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहना कि इसे पूरे पीएसयू बैंकिंग सेक्टर का ट्रेंड मानना गलत होगा। उनके अनुसार यूनियन बैंक का मामला काफी हद तक एक “आइसोलेटेड केस” है और इसे बाकी सरकारी बैंकों की स्थिति से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। यूनियन बैंक पिछले कुछ समय से बहुत मजबूत ग्रोथ नहीं दिखा पाया है। बैंक की वृद्धि दर और प्रदर्शन लगातार औसत स्तर पर रहे हैं, इसलिए कमजोर नतीजों पर बाजार की प्रतिक्रिया अपेक्षित थी। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि सभी पीएसयू बैंक इसी तरह के दबाव में हैं। उनका मानना है कि 2014 के बाद सरकारी बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव आया है और कई पीएसयू बैंकों ने अपनी कार्यशैली, टेक्नोलॉजी और जोखिम प्रबंधन में सुधार किया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक पहले पीएसयू बैंकों की छवि धीमी कार्यप्रणाली और कम दक्षता वाली संस्थाओं की थी। सरकारी नियंत्रण और प्राथमिकता वाले सेक्टरों को सस्ते कर्ज देने जैसी नीतियों के कारण इन बैंकों पर हमेशा अतिरिक्त दबाव रहता था। इससे डिफॉल्ट और एनपीए की समस्या भी बढ़ती थी। लेकिन पिछले एक दशक में स्थिति काफी बदली है। बैंकों ने टेक्नोलॉजी अपनाई, डिजिटल सेवाओं को बढ़ाया और ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार किया है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले सरकारी बैंकों में कामकाज पूरी तरह “डिमांड साइड” पर आधारित होता था, यानी ग्राहक बैंक के पास आता था और उसी हिसाब से काम होता था। अब धीरे-धीरे बैंकिंग संस्कृति बदल रही है और कुछ हद तक “सप्लाई साइड” सोच भी विकसित हुई है। हालांकि अभी भी सरकारी बैंकों का व्यवहार निजी बैंकों जैसा आक्रामक नहीं हुआ है। उदाहरण के लिए एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक की तरह पीएसयू बैंक ग्राहकों के घर तक पहुंचने वाली सेवा संस्कृति में पूरी तरह नहीं आए हैं, लेकिन उनके कामकाज में पहले की तुलना में काफी बदलाव जरूर आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ चुकी है कि सरकारी बैंकों के कर्मचारी भी लंबे समय तक काम कर रहे हैं और दक्षता सुधारने का दबाव महसूस कर रहे हैं। इसी वजह से अब पीएसयू बैंकिंग सेक्टर को पूरी तरह कमजोर मानना सही नहीं होगा। हालांकि उनका यह भी कहना है कि निवेश के नजरिए से सभी सरकारी बैंक आकर्षक नहीं हैं। उनके अनुसार निवेशकों को सिर्फ चुनिंदा गुणवत्ता वाले बैंकों पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि लंबे समय के निवेश के लिए कुछ बड़े और मजबूत निजी बैंक तथा सीमित संख्या में चुनिंदा पीएसयू बैंक ही पर्याप्त हैं। बाकी बैंकों में ट्रेडिंग के अवसर हो सकते हैं, लेकिन हर बैंक निवेश योग्य नहीं होता। इसलिए निवेशकों को पूरे सेक्टर को एक जैसा मानने के बजाय बैंक-दर-बैंक गुणवत्ता, ग्रोथ और प्रबंधन क्षमता का मूल्यांकन करना चाहिए।
(शेयर मंथन, 30 अप्रैल 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)