शेयर बाजार को लेकर दौलत कैपिटल में इक्विटी प्रमुख अमित खुराना का नजरिया संतुलित लेकिन सकारात्मक है।
अमित खुराना का मानना है कि हालिया गिरावट (करेक्शन) ने बाजार को अधिक स्वस्थ आधार दिया है और इसके चलते आने वाले महीनों में भारतीय शेयर बाजार पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
उनके अनुसार, जून 2026 के अंत तक सेंसेक्स 85,000 और निफ्टी 27,000 के स्तर तक पहुँच सकता है। अगले 12 महीनों के लिए उनका आकलन और मजबूत है। दिसंबर 2026 तक वे सेंसेक्स को 95,000 और निफ्टी को 29,000 के स्तर पर देखते हैं।
अमित खुराना के अनुमान |
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सेंसेक्स लक्ष्य (जून 2026) |
85,000 |
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निफ्टी लक्ष्य (जून 2026) |
27,000 |
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सेंसेक्स लक्ष्य (दिसंबर 2026) |
95,000 |
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निफ्टी लक्ष्य (दिसंबर 2026) |
29,000 |
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2025-26 में निफ्टी ईपीएस (रु.) |
1120 |
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2026-27 में निफ्टी ईपीएस (रु.) |
1250 |
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2025-26 की दूसरी छमाही में कॉर्पोरेट आय वृद्धि |
0-10% |
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2025-26 में जीडीपी वृद्धि |
6.7% |
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2026-27 में जीडीपी वृद्धि |
6.8% |
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अगले 6 माह में डॉलर-रुपया विनिमय दर |
88-91 |
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अमेरिका से ट्रेड डील कब तक |
मार्च 2026 |
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सेंसेक्स 1 लाख पर किस वर्ष तक पहुँचेगा |
2027 |
मौजूदा समय में भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक कारक वे हालिया करेक्शन को मानते हैं, जिसने मूल्यांकन को कुछ हद तक संतुलित किया है। वहीं, मिडकैप शेयरों के ऊँचे मूल्यांकन को वे इस समय बाजार के लिए सबसे बड़ा नकारात्मक पहलू मानते हैं।
वैश्विक बाजारों की तुलना में अमित खुराना अगले 12 महीनों में भारतीय बाजार को बेहतर प्रदर्शन करने वाले के रूप में देखते हैं। आने वाले छह महीनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में वे अमेरिकी शुल्क और भू-राजनीतिक घटनाक्रम को गिनाते हैं। उनका मानना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्कों का असर भारतीय बाजारों पर सीमित रहेगा। उन्हें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मार्च 2026 तक पूरा होने की संभावना दिख रही है।
आगामी आम बजट 2026-27 से उनकी प्रमुख अपेक्षा सरकार द्वारा पूँजीगत व्यय बढ़ाने की है, हालाँकि बजट का बाजार पर प्रभाव वे सीमित मानते हैं। ब्याज दरों को लेकर उनका मानना है कि आगे चलकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व और भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से और कटौती की संभावना नहीं है। निजी पूँजीगत व्यय की बहाली को लेकर वे सकारात्मक रुख रखते हैं।
वैश्विक स्तर पर अगले छह महीनों में कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजारों को सबसे अधिक प्रभावित करने वाला कारक हो सकती हैं। विदेशी निवेश के प्रवाह को लेकर उनकी अपेक्षाएँ तटस्थ हैं। डॉलर-रुपया विनिमय दर के बारे में उनका अनुमान है कि अगले छह महीनों में डॉलर 88 से 91 रुपये के दायरे में बना रह सकता है।
अगले 1 साल में पसंदीदा क्षेत्र/शेयर
तेजी वाले क्षेत्र : उपभोग आधारित क्षेत्र
कमजोर क्षेत्र : मिडकैप
5 पसंदीदा शेयर : लार्जकैप
(शेयर मंथन, 21 जनवरी 2026)