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महँगाई और ब्याज दरें तय करेंगी बाजार की दिशा

अमित खुराना

इक्विटी प्रमुख, दौलत कैपिटल

भारतीय शेयर बाजार को लेकर मेरा रुख सकारात्मक है। हालाँकि अगले 12 महीनों में मेरा मानना है कि भारतीय बाजार वैश्विक बाजारों के अनुरूप ही प्रदर्शन करेंगे।

मेरे अनुमान के अनुसार दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स 80,000 और निफ्टी 26,000 के स्तर तक पहुँच सकते हैं। जून 2027 के लिए मेरा लक्ष्य क्रमशः 85,000 और 27,000 का है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निफ्टी का ईपीएस 1,240 रुपये और वित्त वर्ष 2027-28 के लिए 1,400 रुपये रहने का अनुमान है। मुझे 2026-27 की पहली छमाही में कॉर्पोरेट आय में 0-10% वृद्धि की उम्मीद है। भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2026-27 में 6% और 2027-28 में 6.3% रहेगी।

इस समय भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक कारक कच्चे तेल की कम कीमतें हैं। वहीं, वैश्विक ब्याज दरें सबसे बड़ा नकारात्मक कारक बनी हुई हैं। अगले 12 महीनों में उपभोक्ता क्षेत्र (Consumer Sector) बेहतर प्रदर्शन कर सकता है, जबकि धातु (Metal) क्षेत्र बाजार से कमजोर रह सकता है। अभी कंज्यूमर स्टेपल्स, ड्यूरेबल और होटल कंपनियों के शेयर मुझे सबसे अधिक पसंद हैं।

अगले छह महीनों में भारतीय बाजारों की दिशा तय करने में महँगाई और ब्याज दरों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। अमेरिका-ईरान युद्ध का भारत और भारतीय शेयर बाजारों पर हल्का नकारात्मक असर पड़ा है। फिलहाल यह कहना कठिन है कि क्या यह संघर्ष समाप्त हो गया है और क्या अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो सकेगा।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता दिसंबर 2026 तक हो जाने की आशा बन रही है। यदि यह समझौता अगले 3-6 महीनों के भीतर होता है, तो भारतीय बाजारों पर इसका असर तटस्थ रहेगा। वहीं, यदि वैश्विक और घरेलू ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो उनका असर बाजारों पर नकारात्मक होगा।

वैश्विक एआई बुलबुले के बारे में फिलहाल मैं कोई स्पष्ट राय नहीं दे सकता। अगले 6 महीनों में वैश्विक स्तर पर महँगाई भारतीय बाजारों को सबसे अधिक प्रभावित कर सकती है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) कब शुद्ध खरीदार बनेंगे, इस बारे में भी अभी कुछ कहना कठिन है।

मेरा अनुमान है कि अगले 6 महीनों में डॉलर-रुपया विनिमय दर 91-95 रुपये के दायरे में बनी रहेगी। सेंसेक्स 2028 तक 1 लाख के स्तर तक पहुँचने की संभावना लगती है।

(शेयर मंथन, 13 जुलाई 2026)

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