बृजेश आइल
सीनियर एनालिस्ट, श्रीराम रिसर्च
मैं भारत की विकास गाथा को लेकर अब भी उत्साहित हूँ और मेरा मानना है कि मजबूत आर्थिक बुनियाद और कॉर्पोरेट आय में सुधार की संभावनाएँ भारतीय बाजार को आगे भी सहारा देती रहेंगी। अगले 12 महीनों में भारतीय शेयर बाजार वैश्विक बाजारों से बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
इस समय भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक पक्ष कच्चे तेल की कीमतों का 70 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास आ जाना है। इससे आयातित महँगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी, सब्सिडी और आयात बिल का दबाव घटेगा तथा राजकोषीय घाटे की स्थिति में भी सुधार होगा। महँगाई नियंत्रित रहने से आर्थिक वृद्धि के लिए अनुकूल माहौल बनेगा, जिसका फायदा कॉर्पोरेट आय और शेयर बाजार दोनों को मिलेगा। दूसरी ओर, वैश्विक व्यापार एवं टैरिफ से जुड़े जोखिम और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली बाजार के लिए प्रमुख नकारात्मक कारक बने हुए हैं।
मेरे विचार से अगले 6 महीनों में अमेरिका-ईरान युद्ध एवं भूराजनीतिक घटनाक्रम भारतीय बाजारों की दिशा तय करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारक होंगे। इस संघर्ष का भारत और भारतीय शेयर बाजारों पर हल्का नकारात्मक असर पड़ा है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर अभी कोई निश्चित समय-सीमा बताना मुश्किल है। यह कैलेंडर वर्ष 2027 के दौरान कभी भी अंतिम रूप ले सकता है। हालाँकि यदि ऐसा समझौता अगले 3-6 महीनों में हो जाता है, तो उसका असर भारतीय बाजारों पर सकारात्मक रहेगा। वैश्विक और घरेलू ब्याज दरों का रुख भी बाजार के लिए सकारात्मक रहेगा। यदि एआई का बुलबुला फूटता है तो इससे भारतीय शेयर बाजार को फायदा ही होगा।
बाजार के स्तरों की बात करें तो मैं दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स को 80,000 और निफ्टी को 26,000 के स्तर पर देखता हूँ। जून 2027 तक सेंसेक्स 86,000 और निफ्टी 27,000 तक पहुँच सकते हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निफ्टी का ईपीएस 1,398 रुपये और 2027-28 के लिए 1,600 रुपये रहने का मेरा अनुमान है। मुझे 2026-27 की पहली छमाही में कॉर्पोरेट आय में 10-20% वृद्धि की उम्मीद है। भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2026-27 में 6.5% और 2027-28 में 6.6% रहेगी।
अगले 12 महीनों में स्वास्थ्य सेवाएँ (हेल्थकेयर), माइक्रोकैप और ऊर्जा (Energy) क्षेत्र बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, जबकि आईटी, तेल-गैस और एफएमसीजी क्षेत्र बाजार से कमजोर रह सकते हैं। मेरी पसंद के 5 प्रमुख शेयर जीई वर्नोवा, सुप्रिया लाइफसाइंस, ल्युपिन, सुजलॉन और केपीआर मिल्स हैं। अगले 6 महीनों में डॉलर-रुपया विनिमय दर 95-99 रुपये के दायरे में जा सकती है। सेंसेक्स को 1 लाख के स्तर तक पहुँचने में वर्ष 2028 तक का समय लग जायेगा।
(शेयर मंथन, 18 जुलाई 2026)