डी. के. अग्रवाल
सीएमडी, एसएमसी कैपिटल्स
मैं भारतीय शेयर बाजार को लेकर बेहद सकारात्मक हूँ। भारत की मजबूत व्यापक (मैक्रो) आर्थिक बुनियाद, स्थिर सरकार, कच्चे तेल की घटती कीमतें और अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की संभावना बाजार के लिए बड़े सकारात्मक कारक हैं।
इनसे अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट क्षेत्र दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिसके चलते मेरा मानना है कि अगले 12 महीनों में भारतीय बाजार वैश्विक बाजारों से बेहतर प्रदर्शन करेंगे। हालाँकि कुछ जोखिमों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कमजोर मानसून, भूराजनीतिक परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका की अप्रत्याशित टैरिफ नीति बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकती है।
अगले 6 महीनों में अमेरिका-ईरान से जुड़े घटनाक्रम, अमेरिकी टैरिफ नीति और कंपनियों के तिमाही नतीजे भारतीय बाजार की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। इन 6 महीनों में अमेरिका-ईरान शांति समझौते में गतिरोध भारतीय बाजारों को प्रभावित करने वाला सबसे प्रमुख वैश्विक कारक हो सकता है। मुझे उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) भारतीय बाजार में शुद्ध खरीदार बनने लगेंगे।
अमेरिका-ईरान युद्ध का भारत और भारतीय शेयर बाजार पर बड़ा नकारात्मक असर पड़ा है। हालाँकि मेरा मानना है कि दोनों देशों के बीच अंतिम समझौता हो जायेगा। साथ ही, उम्मीद है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता दिसंबर 2026 तक हो जायेगा। यदि यह अगले 3-6 महीनों में हो जाता है, तो भारतीय बाजारों पर इसका बहुत सकारात्मक असर पड़ेगा।
ब्याज दरों को लेकर मेरा मानना है कि यदि अगले एक वर्ष में अमेरिकी फेडरल रिजर्व और भारतीय रिजर्व बैंक की रेपो दरों में 1% से अधिक की बढ़ोतरी होती है, तो उसका बाजार पर नकारात्मक असर पड़ेगा। यदि बढ़ोतरी इससे कम रहती है, तो उसका प्रभाव बहुत अधिक नहीं होगा। मेरी राय में वैश्विक एआई बुलबुला अभी नहीं फूटा है।
सूचकांकों के स्तरों पर विचार करें तो मैं दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स को 84,500 और निफ्टी को 26,500 के स्तर पर देखता हूँ। जून 2027 तक सेंसेक्स 90,000 और निफ्टी 28,000 तक पहुँच सकते हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निफ्टी का ईपीएस 1,225 रुपये और 2027-28 के लिए 1,425 रुपये रहने का मेरा अनुमान है। मुझे 2026-27 की पहली छमाही में कॉर्पोरेट आय में 0-10% वृद्धि की उम्मीद है। भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 में 6.7% और वित्त वर्ष 2027-28 में 7.5% रहेगी।
अगले 12 महीनों में हेल्थकेयर एवं फार्मा, पावर, डिफेंस, मैन्युफैक्चरिंग, टेलीकॉम और कंज्यूमेबल क्षेत्र बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। दूसरी ओर रियल एस्टेट, आईटी और टेक्सटाइल क्षेत्र कमजोर रह सकते हैं। अगले 6 महीनों में डॉलर-रुपया विनिमय दर 95-99 रुपये के दायरे में जा सकती है। सेंसेक्स को 1 लाख के स्तर पर पहुँचने में 2028 तक का समय लग जायेगा।
(शेयर मंथन, 18 जुलाई 2026)