संदीप सभरवाल
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भारतीय शेयर बाजार का मौजूदा परिदृश्य मुझे यहाँ से सकारात्मक नजर आ रहा है और सेंसेक्स वर्ष 2028 तक 1 लाख का स्तर हासिल कर सकता है।
दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स करीब 85,000 और निफ्टी करीब 26,300 के स्तर तक पहुँच सकते हैं। अगले 12 महीनों के लिए सेंसेक्स का मेरा लक्ष्य 90,000 और निफ्टी का लक्ष्य 27,600 है। मेरा मानना है कि अगले 12 महीनों में भारतीय बाजार वैश्विक बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कॉर्पोरेट आय में 10-20% की वृद्धि की उम्मीद है। निफ्टी की प्रति शेयर आय (ईपीएस) 2026-27 में 1,260 रुपये और 2027-28 में 1,430 रुपये रह सकती है। भारत की आर्थिक विकास दर (जीडीपी वृद्धि) 2026-27 में 6.7% और 2027-28 में 7.1% रहने का अनुमान है।
इस समय भारतीय शेयर बाजार के लिए कमोडिटी कीमतों का निचला स्तर सबसे बड़ा सकारात्मक कारक है। इसके विपरीत, मॉनसून को लेकर संभावित जोखिम बाजार के लिए चिंता का विषय है। अगले 6 महीनों में कच्चे तेल और वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति, कंपनियों के तिमाही नतीजे तथा महँगाई एवं ब्याज दरों की दिशा भारतीय बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक होंगे। वैश्विक स्तर पर भी कमोडिटी कीमतों और ब्याज दरों की दिशा बाजार को प्रभावित करेगी। मेरा मानना है कि वैश्विक एआई का बुलबुला फूटना शुरू हो चुका है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष का भारतीय बाजार पर अब तक हल्का नकारात्मक प्रभाव रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौते को लेकर मैं निश्चित नहीं हूँ। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी मैं अभी कुछ नहीं कह सकता। हालाँकि, यदि यह समझौता दिसंबर 2026 तक हो जाता है, तो इसका भारतीय बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
ब्याज दरों की दिशा का बाजार पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। वैश्विक और घरेलू ब्याज दरों में होने वाले बदलाव बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। अगले 12 महीनों में मुझे ऑटोमोबाइल, इन्फ्रास्ट्रक्चर और बैंकिंग क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। इसके विपरीत, आईटी और कमोडिटी से जुड़े क्षेत्र अपेक्षाकृत कमजोर रह सकते हैं। अगले 6 महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपया 91-95 के दायरे में रहने की संभावना है।
(शेयर मंथन, 21 जुलाई 2026)