शेयर मंथन में खोजें

वित्त वर्ष 24 की दूसरी तिमाही में SBI का मुनाफा 8% बढ़ा

सरकारी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) ने चालू वित्त वर्ष 23-24 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। स्टैंडअलोन आधार पर बैंक के मुनाफे में 8% की वृद्धि हुई है। बैंक का मुनाफा 13,265 करोड़ रुपये से बढ़कर 14,330 करोड़ रुपये हो गया है।

बतायी गयी अवधि में ब्याज से शुद्ध आय में 12.8% की बढ़त रही है। इस दौरान ब्याज से शुद्ध आय 35,183 करोड़ रुपये से बढ़कर 39,500 करोड़ रुपये हो गई है। सालाना आधार पर प्रोविजन 9.75% गिरकर 2011 करोड़ रुपये से 1815 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, तिमाही आधार पर प्रोविजन 31.6% गिरावट के साथ 2652 करोड़ रुपये से घटकर 1815 करोड़ रुपये रह गया है।

दूसरी तिमाही में नए एनपीए (NPA) में 59.7% की बढ़त देखने को मिली है। नए एनपीए 2399 करोड़ रुपये से बढ़कर 3831 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं तिमाही आधार पर नए एनपीए में 50% की गिरावट आई है और यह 7659 करोड़ रुपये से घटकर 3831 करोड़ रुपये रह गई है। क्रेडिट वृद्धि 12.4% रही है।

घरेलू स्तर पर एडवांसेज में 13.2% की बढ़त रही है। रिटेल एडवांसेज में 15.7% की वृद्धि दर्ज हुई है। जमा वृद्धि 11.9% रही है। सालाना आधार पर रिटर्न ऑन एसेट 1.04% से घटकर 1.01% रही। वहीं बैंक का सकल एनपीए 2.76% से घटकर 2.55% हो गया है जबकि शुद्ध एनपीए 0.74% से घटकर 0.64% रह गया है।

शुद्ध ब्याज मार्जिन 3.33% से घटकर 3.29% रह गया है। वहीं घरेलू शुद्ध ब्याज मार्जिन 3.47% से घटकर 3.43% रह गया है। कासा यानी (CASA) रेश्यो 42.88% से घटकर 41.88% रह गया है।

(शेयर मंथन, 05 नवंबर 2023)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख