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सरकार ने लगातार 5वीं तिमाही में नहीं बदली पीपीएफ, एनएससी और सुकन्या समृद्धी की ब्याज दर

सरकार ने पीपीएफ, एसएसीएसएस या सुकन्या समृद्धी योजना की ब्याज दरों को तय कर दिया है। सरकार ने नये वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। इन योजनाओं की ब्याज दरों में लगातार 5 तिमाहियों से कोई बदलाव नहीं किया है। 

भारत को छूट के साथ चला ट्रंप के टैरिफ का चाबुक, दुनियाभर के बाजारों में हाहाकार

दुनिया को जिस घोषणा का शिद्दत से इंतजार था, वो आखिर हो गयी और अमेरिकी राष्टपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने व्यापारिक साझेदारों या यूँ कहें कि दुनिया पर पारस्परिक शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) का चाबुक चलाने की आधिकारिक घोषणा करते हुए इसे अपने देश के लिए मुक्ति दिवस बताया। हालाँकि, ट्रंप के इस कदम से दुनिया पर मंडरा रहा व्यापार युद्ध का खतरा गहरा गया है।

वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में 10% बढ़ा जीएसटी संग्रह

नया वित्त वर्ष 2025-26 सरकार के लिए अच्छा साबित हुआ है। आँकड़े बताते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था ने पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया जिसका असर जीएसटी संग्रह पर दिख रहा है। इस अवधिक में सरकार का जीएसटी संग्रह 10% बढ़ा है।

नयी पेंशन योजना यूपीएस हुई लागू, इस तरह एनपीएस से यूपीएस में कर सकते हैं स्विच

केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए घोषित एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) 1 अप्रैल 2025 से लागू हो गयी है। यूपीएस को एनपीएस के समानांतर लागू किया गया है और सरकारी कर्मचारी एनपीएस से यूपीएस में भी शिफ्ट हो सकते हैं। हालाँकि, इसके लिए उन्हें कुछ प्रक्रियाओं का पालन करना होगा, जिसके बाद वे नयी पेंशन स्कीम से जुड़ जायेंगे।

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निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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