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सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा देने की रेस में कूदी वोड-आइडिया, स्टारलिंक समेत अन्य के साथ बातचीत शुरू

एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक के साथ भारती एयरटेल और रिलायंस जियो के करार के बाद वोडाफोन आइडिया ने भी इस विदेशी कंपनी के साथ साझेदारी के लिए अपने कदम बढ़ा दिये हैं। हालाँकि एयरटेल और जियो जहाँ करार कर चुकी हैं, वहीं वोडाफोन और स्टारलिंक का मामला भी बातचीत के स्तर पर है। वहीं एयरटेल और जियाे को अब सरकार की मंजूरी का इंतजार है। 

2 अप्रैल से पहले इंतजार करो और देखो की रणनीति अपना रहा बीओजे, नहीं बढ़ायी ब्याज दरें

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के साथ ही पूरी दुनिया के बाजारों में जबरदस्त उठा-पटक देखने को मिल रही है। मार्च आधे से ज्यादा खत्म हो चुका है और अब सबको 2 अप्रैल की तारीख का इंतजार है, जब अमेरिका अपने यहाँ आयात होने वाली वस्तुओं पारस्परिक शुल्क लगायेगा। इस कदम का असर समय से पहले ही दिखना शुरू हो गया है और जापान के केंद्रीय बैंक ने हाल ही में सम्पन्न हुई मौद्रिक नीति की बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया है। 

गिरते बाजार में म्यूचुअल फंड ने दी निवेशकों को राहत, कई फंड ने दिया बेंचमार्क से बेहतर रिटर्न

गिरते बाजार में म्यूचुअल फंड ने निवेशकों की गाढ़ी कमाई को संभालने का किया है। एक रिपोर्ट कहती है कि इक्विटी फंड ने फरवरी में एनएसई में उनकी श्रेणी के बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया है।

एक के बाद एक झटकों से हिला इंडसइंड बैंक, नुकसान का अनुमान लगाना मुश्किल

इंडसइंड बैंक की परेशानियाँ बढ़ गयी हैं, क्योंकि उसने अपने डेरिवेटिव्स पोर्टफोलियो में 1,580 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का खुलासा किया है। ये रकम बैंक की कुल संपत्ति का 2.35% हो सकती है। ये समस्या सितंबर-अक्टूबर 2024 के बीच सामने आई है।

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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