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दाम घटाने का मंत्र

राजीव रंजन झा

भारतीय उद्योग जगत के लिए चीफ मार्केटिंग ऑफिसर या चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर की भूमिका निभाकर वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कल प्रमुख उद्योग संगठन सीआईआई के इंडिया इकोनॉमिक समिट में अर्थशास्त्र के कुछ बुनियादी सिद्धांत समझाये। जो सबसे प्रमुख बात उन्होंने कही, वह है दाम घटाने की। उनका कहना है कि विश्व अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत में अगर कंपनियों को अपने उत्पादों की मांग बढ़ानी है, तो उन्हें दाम घटाने होंगे। लेकिन लगता है कि ज्यादातर उद्योगों को उनकी यह बिना मांगी सलाह कुछ जमी नहीं।

बैंकिंग क्षेत्र पर खास नजर

पशुपति सुब्रह्मण्यम, रिसर्च प्रमुख, वेंचुरा सिक्योरिटीज

आज यदि हम पिछले 4-5 कारोबारी सत्रों को देखें, तो भारतीय शेयर बाजारों में यहाँ की अंदरूनी वजहों पर कारोबार की निर्भरता बढ़ी है। यानी हम अमेरिकी शेयर बाजारों से ज्यादा संकेत नहीं ले रहे हैं। मुझे आज के बाजार में कोई सकारात्मक बात नहीं दिख रही। यह या तो कमजोर रहेगा या फिर सपाट रह सकता है।

भारतीय शेयर बाजारों की बढ़त में कमी

2:00: सुबह के कारोबार में मजबूती दिखाने के बाद इस समय भारतीय शेयर बाजार की बढ़त में कमी आयी है। इस समय सेंसेक्स 145 अंक ऊपर 9,082 पर है। निफ्टी में 39 अंकों की मजबूती है और यह 2,722 पर है। बीएसई स्मॉलकैप और बीएसई मिडकैप लाल निशान में हैं। टीईसीके और आईटी सूचकांक को छोड़ कर बीएसई के सभी क्षेत्रवार सूचकांकों में मजबूती है। आईटी सूचकांक में 0.82% की गिरावट है। रियल्टी सूचकांक में 3.34%, तेल-गैस सूचकांक में 2.96% और एफएमसीजी सूचकांक में 2.94% की बढ़त है। स्टरलाइट इंडस्ट्रीज में 4.7%, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 4.66%, आईटीसी में 4.26% और महिंद्रा एंड महिंद्रा में 4.03% की मजबूती है। मारुति सुजुकी, डीएलएफ, एसीसी और रैनबैक्सी में 3.5% से अधिक की बढ़त है।  सत्यम कंप्यूटर्स में 3.45% की गिरावट है। 

यूरोप-अमेरिका मजबूत, एशियाई बाजारों में गिरावट

मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में दिन भर उतार-चढ़ाव का दौर बना रहा और कारोबार के आखिरी घंटों में शेयरों में आयी मजबूती की वजह से डॉव जोंस 1.83% की बढ़त के साथ बंद हुआ। नैस्डैक सूचकांक भी आखिरकार हरे निशान में बंद होने में सफल रहा। विश्लेषकों का मानना है कि मंगलवार को दर्ज की गयी मजबूती से यह नहीं मान लेना चाहिए कि हम वापसी की राह पर चल पड़े हैं, क्योंकि अभी भी बाजार अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आने वाली संभावित मंदी की चिंता से ग्रस्त है। थोक मूल्य सूचकांक और भवन निर्माण बाजार से संबंधित आंकड़ों ने इस आशंका को सच ही साबित किया है और इसकी वजह से निवेशकों में निराशा है। शेयर बाजारों में कारोबार की कम मात्रा भी चिंता का विषय बनी हुई है।

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