भारतीय शेयर बाजार में हाल के कारोबारी सत्र में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिला।
बाजार विशेषज्ञ शरद अवस्थी का कहना है कि इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह वैश्विक तनावों में कमी की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और मानसून को लेकर बेहतर संकेत रहे। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की संभावना से निवेशकों की चिंताएं घटीं, जबकि तेल की कीमतों में गिरावट ने महंगाई को लेकर डर कम किया। इसके साथ ही मानसून में अत्यधिक देरी की आशंकाएं भी कमजोर पड़ती दिखीं, जिससे बाजार में राहत की भावना बनी। इन सभी कारकों ने मिलकर निवेशकों का विश्वास बढ़ाया और बाजार को नई ऊर्जा प्रदान की।
पिछले कुछ दिनों से निवेशक इस बात को लेकर चिंतित थे कि यदि दोनों देशों के बीच संघर्ष लंबा चलता है तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है। लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने संकेत दिए हैं कि दोनों पक्ष किसी न किसी समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली, जिसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
दूसरी ओर, मानसून को लेकर भी राहतभरी खबरें सामने आईं। कुछ समय पहले तक यह आशंका जताई जा रही थी कि मानसून में देरी हो सकती है, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। हालांकि अब मौसम विभाग और अन्य एजेंसियों से मिले संकेतों ने निवेशकों की चिंता को काफी हद तक कम कर दिया है। भारत जैसी कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में मानसून का सीधा प्रभाव खपत, बैंकिंग और कई अन्य क्षेत्रों पर पड़ता है। ऐसे में मानसून को लेकर सकारात्मक संकेतों ने बाजार में नई ऊर्जा भरने का काम किया।
(शेयर मंथन, 08 जून 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)