वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज (1 फरवरी 2026) संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए भारत की आर्थिक वृद्धि को तेज करने और बनाए रखने के लिए मजबूत रणनीति प्रस्तुत की।
उन्होंने पिछले 12 वर्षों में देश की आर्थिक यात्रा को स्थिरता, वित्तीय अनुशासन, सतत विकास और नियंत्रित महँगाई से चिह्नित बताया। बजट तीन प्रमुख कर्तव्यों (kartavyas) पर आधारित है, जिसमें पहला कर्तव्य आर्थिक विकास को तेज करना और बनाये रखना है।
इस उद्देश्य से वित्त मंत्री ने 6 प्रमुख क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेप (targeted interventions) की घोषणा की, जो आर्थिक वृद्धि को मजबूत करने वाली मुख्य घोषणाएँ हैं :
- 7 रणनीतिक और अग्रणी क्षेत्रों में विनिर्माण (manufacturing) को बढ़ावा देना : इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, रक्षा आदि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
- पुराने औद्योगिक क्षेत्रों (legacy industrial sectors) का पुनरुद्धार : पारंपरिक उद्योगों की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान, ताकि वे आधुनिक अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकें।
- चैंपियन एमएसएमई बनाना (champion MSMEs) : अर्थव्यवस्था की रीढ़ एमएसएमई को मजबूत करने के लिए विशेष योजनाएँ, जो रोजगार सृजन और निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगी।
- पूरे देश में बुनियादी ढाँचे (infrastructure) का मजबूत विकास : सार्वजनिक पूँजीगत व्यय (govt. capex) को वित्त-वर्ष 2026-27 के लिए ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ाने का प्रस्ताव, जिसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड जैसी नयी व्यवस्थाएँ शामिल हैं।
- आर्थिक और वित्तीय प्रणालियों (economic and financial systems) में दीर्घकालिक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना : वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूत वृहत् आर्थिक (मैक्रोइकॉनॉमिक) आधार और वित्तीय स्थिरता पर जोर।
- शहर आर्थिक क्षेत्रों (city economic regions) का विकास : क्षेत्रीय विकास और शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए शहर-आधारित आर्थिक क्षेत्रों पर फोकस, जो दूसरी श्रेणी (टियर-2) और तीसरी श्रेणी (टियर-3) शहरों को भी मजबूत बनायेगा।
ये 6 क्षेत्र भारत को विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ाने, उत्पादकता बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए चुने गये हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, वित्त-वर्ष 2026-27 में जीडीपी वृद्धि 6.8-7.2% रहने का अनुमान है, और ये घोषणाएँ इसे और मजबूत बनाने में सहायक होंगी। (शेयर मंथन, 1 फरवरी 2026)