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चंदा कोचर होंगीं आईसीआईसीआई बैंक की नयी एमडी-सीईओ

देश के सबसे बड़े निजी बैंक में आखिरकार शीर्ष नेतृत्व बदलने का ऐलान हो गया है। आईसीआईसीआई बैंक ने चंदा डी कोचर को अपना नया एमडी और सीईओ बनाने का फैसला किया है। वे यह जिम्मेदारी 1 मई 2009 से संभालेंगीं। बैंक के मौजूदा एमडी और सीईओ के वी कामत 1 मई 2009 से 5 साल के लिए नॉन-एक्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाये गये हैं। बैंक के मौजूदा नॉन-एक्जीक्यूटिव चेयरमैन एन वागुल का कार्यकाल 30 अप्रैल 2009 को समाप्त हो रहा है।

चंदा डी कोचर अभी इस समय बैंक की ज्वाइंट एमडी और सीएफओ के पद पर हैं। एमडी और सीईओ के रूप में उनका कार्यकाल 31 मार्च 2014 तक, यानी करीब 5 साल का होगा। उन्हें के वी कामत का स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना जा रहा था। कुछ समय पहले तक नचिकेत मोर की चर्चा कामत के उत्तराधिकारी के तौर पर होती थी, लेकिन नचिकेत मोर ने सामाजिक कार्यों वाले फाउंडेशन का काम संभालने को ज्यादा तवज्जो दी। इस समय वे आईसीआईसीआई फाउंडेशन के प्रमुख हैं। हाल में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल की प्रमुख शिखा शर्मा की चर्चा भी संभावित दावेदारों में हुई, लेकिन आखिरकार बाजी चंदा कोचर के ही हाथ लगी। यह माना जा सकता है कि खुदरा बैंकिंग और कॉर्पोरेट बैंकिंग, दोनों में अपनी दक्षता साबित करना उनके पक्ष में गया।

आईसीआईसीआई बैंक के खुदरा कारोबार को स्थापित करने और बाजार में इसकी पैठ जमाने में कोचर की प्रमुख भूमिका रही है। उन्होंने अपने प्रबंधकीय जीवन की शुरुआत आईसीआईसीआई बैंक से ही की थी और इससे 1984 में प्रबंधन प्रशिक्षु (मैनेजमेंट ट्रेनी) के रूप में जुड़ी थीं। जब देश की प्रमुख वित्तीय संस्था आईसीआईसीआई ने 1993 में व्यावसायिक बैंकिंग के कारोबार में उतरने का फैसला किया, तब चंदा कोचर को इस कारोबार की स्थापना करने वाले केंद्रीय समूह में शामिल किया गया था। उन्हें वर्ष 2000 में खुदरा बैंकिंग की बागडोर सौंपी गयी और 2001 में बैंक के निदेशक बोर्ड का सदस्य बनाया गया। उन्हें 2006 से ही भविष्य में बैंक का शीर्ष नेतृत्व हासिल करने के दावेदारों में गिना जाने लगा, जब उन्हें डिप्टी एमडी बनाया गया। उनकी यह दावेदारी तब और मजबूत हो गयी, जब उन्हें ज्वाइंट एमडी और सीएफओ की भूमिका सौंपी गयी।

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