शेयर मंथन में खोजें

शेयरों पर नजर (Stocks to Watch) : एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस, अदाणी एंटरप्राइजेज, इन्फोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा

खबरों के कारण जो शेयर आज नजर में रहेंगे उनमें एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस, अदाणी एंटरप्राइजेज, इन्फोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा शामिल हैं।

बीएसई सेंसेक्स में बदलाव - 24 दिसंबर से एचसीएल टेक्नोलॉजीज, बजाज फाइनेंस सेंसेक्स में विप्रो, अदाणी पोर्ट्स की जगह लेंगी।
एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस - कंपनी के बोर्ड ने रशद अबादन और जेम्स एयर्ड को वैकल्पिक निदेशकों के रूप में नियुक्त किया।
अदाणी एंटरप्राइजेज - कंपनी ने पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, मुंद्रा कॉपर शुरू की।
इन्फोसिस - कंपनी की उत्पाद सहायक कंपनी एजवर्व सिस्टम्स ने सफलतापूर्वक प्रॉक्सिमिटीपेएज डिजिटल पेमेंट्स सॉल्यूशंस लागू किया।
एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक - बैंक गैर-परिवर्तनीय बॉन्ड के जरिये 500 करोड़ रुपये की पूँजी जुटायेगा।
आईएलऐंडएफएस - कंपनी 22 नवंबर को 218 करोड़ रुपये के अल्पकालिक जमा का ब्याज सहित भुगतान करने में असमर्थ रही।
विपुल ऑर्गेनिक्स - एफ्फेरकेम के स्वयं के साथ विलय के लिए कंपनी को बीएसई से अनापत्ति पत्र मिल गया है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज - रिलायंस इंडस्ट्रीज की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रियल ने जियो एस्टोनिया नाम से अपनी सहायक कंपनी स्थापित की।
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा - कंपनी ने अल्टूरस जी4 नाम से एक नयी लक्जरी एसयूवी पेश की।
जीपीटी इन्फ्राप्रोजेक्ट्स - कंपनी को 81.50 करोड़ रुपये का ठेका मिला। (शेयर मंथन, 26 नवंबर 2018)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख