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गिरते बाजार का असर, 9 महीने के निचले स्तर पर इक्विटी में म्यूचुअल फंडों का एयूएम

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर लगातार बना हुआ है। फरवरी लगातार 5वां महीना रहा है, जब निफ्टी लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान मानक सूचकांक में 5.9% की मासिक गिरावट दर्ज की गयी, जो मार्च 2020 के बाद दूसरी सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। बाजार की इस गिरावट का असर म्यूचुअल फंड उद्योग पर भी पड़ रहा है।

फरवरी महीने के दौरान म्यूचुअल फंडों का इक्विटी में एयूएम (प्रबंधित परिसंपत्ति) 6.7% की गिरावट के साथ 30.1 लाख करोड़ रुपये पर आ गया, जो नौ महीने का सबसे निचला स्तर है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) द्वारा जारी फंड फोलियो रिपोर्ट (मार्च 2025) में ये आँकड़े दिये गये हैं।

इन कारणों से आयी है यह गिरावट

एमओएफएसएल की फंड फोलियो रिपोर्ट (मार्च 2025) के अनुसार, म्यूचुअल फंडों के इक्विटी एयूएम में आयी इस गिरावट की मुख्य वजह बाजार में सुस्ती, वैश्विक आर्थिक वृद्धि से जुड़ी चिंतायें और शुल्क युद्ध है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लगातार भारतीय बाजार से पैसे निकाल रहे हैं। फरवरी में एफआईआई ने 5.4 अरब डॉलर की निकासी की। इससे पहले जनवरी में उन्होंने 8.4 अरब डॉलर निकाले थे। हालाँकि, घरेलू निवेशकों ने बाजार में मजबूती दिखायी है। फरवरी में घरेलू निवेशकों ने 7.4 अरब डॉलर का निवेश किया है। इससे पहले जनवरी में घरेलू निवेशकों ने 10 अरब डॉलर का निवेश किया था।

कम हो गया म्यूचुअल फंडों का कुल एयूएम

रिपोर्ट के अनुसार, म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल एयूएम भी फरवरी महीने में 4% कम होकर 64.5 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। इसमें सबसे ज्यादा कमी इक्विटी फंडों में 2,150 अरब रुपये की आयी। इनके अलावा अन्य एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) में 360 अरब रुपये और बैलेंस्ड फंडों में 236 अरब रुपये की कमी देखी गयी। हालाँकि, लिक्विड फंडों में 63 अरब रुपये की बढ़ोतरी हुई। आलोच्य माह के दौरान इक्विटी योजनाओं की बिक्री में भी 17.4% की कमी आयी और यह 629 अरब रुपये रही। भुनाने (रिडेम्प्शन) की रफ्तार भी धीमी पड़ी और यह 5.7% कम होकर 295 अरब रुपये रही। इस तरह, शुद्ध निवेश (नेट इनफ्लो) 10 महीने के निचले स्तर 334 अरब रुपये पर आ गया, जो जनवरी में 449 अरब रुपये रहा था।

सिप के जरिये निवेश में मजबूती बरकरार

दूसरी ओर, निवेशकों का म्यूचुअल फंडों में भरोसा बरकरार है। सिप के जरिए निवेश फरवरी महीने में 260 अरब रुपये रहा। यह पिछले महीने यानी जनवरी 2025 की तुलना में मामूली 1.5% कम रहा, लेकिन पिछले साल की समान अवधि यानी फरवरी 2024 की तुलना में 35.5% अधिक है। पिछले महीने सेक्टरों के हिसाब से आवंटन में भी बदलाव देखा गया। निजी क्षेत्र के बैंकों का भार 16 महीने के उच्चतम स्तर 18.5% पर पहुँच गया, जबकि पूँजीगत वस्तुएँ, प्रौद्योगिकी, वाहन और उपभोग जैसे क्षेत्रों का भार कम हुआ।

(शेयर मंथन, 18 मार्च 2025)

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