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बैंक ऑफ इंडिया ने सा-धन के साथ किया समझौता, छोटे उद्यमों का वित्तपोषण लक्ष्य

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ इंडिया ने आरबीआई द्वारा नियुक्त सूक्ष्म वित्त स्व-नियामक संगठन सा-धन के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों और महिलाओं की अगुवाई वाले उद्यमों के लिए वित्तपोषण की पहुँच को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। दोनों संगठन राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करेंगे।

बैंक ऑफ इंडिया ने एक बयान में इसकी जानकारी दी। बैंक ने बताया कि यह एमओयू एक गैर-वाणिज्यिक व्यवस्था है, जिसमें सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है। इनमें स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और गैर-एसएचजी सदस्यों के लिए वित्तपोषण, जलवायु के अनुकूल प्रौद्योगिकियों और हरित उद्यमों का वित्तपोषण, वॉश (जल, साफ-सफाई एवं स्वच्छता) वित्तपोषण, सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) के साथ मिलकर ऋण, डिजिटल परिवर्तन और प्रौद्योगिकी को अपनाना आदि शामिल है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय साक्षरता और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

इस समझौते का उद्देश्य सूक्ष्म वित्त संस्थानों के साथ सहयोग को बढ़ाकर उपेक्षित समुदायों, विशेष रूप से महिला उद्यमियों के लिए किफायती और लचीला वित्तपोषण प्रदान करना है। इसके तहत डिजिटल मंचों के माध्यम से ऋण वितरण और निगरानी की जायेगी। बैंक ऑफ इंडिया और सा-धन ग्रामीण उद्यमियों के बीच सरकारी योजनाओं, वित्तीय सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए पहल करेंगे।

बैंक ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक पी.आर. राजगोपाल ने कहा, “सा-धन के साथ हमारी साझेदारी सूक्ष्म, लघु एवं महिलाओं की अगुवाई वाले उद्यमों को समय पर और बिना किसी रुकावट के वित्त उपलब्ध कराकर उन्हें मजबूती प्रदान करेगी। यह वित्तीय समावेशन और सतत विकास लक्ष्यों को समर्थन देगा, एसएचजी और गैर-एसएचजी सदस्यों को लाभ पहुँचायेगा, हरित वित्तपोषण के माध्यम से जलवायु के अनुकूल प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देगा और वॉश तथा डिजिटल साक्षरता की पहलों का विस्तार करेगा।”

(शेयर मंथन, 06 मई 2025)

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