शेयर मंथन में खोजें

क्या ट्रंप और मोदी के बीच टैरिफ युद्ध से भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी?

भारत और अमेरिका लंबे समय से वैश्विक आर्थिक प्रणाली के महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और दोनों देशों के बीच सैकड़ों अरब डॉलर का व्यापार होता है। लेकिन हाल के महीनों में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और बयानों ने रिश्तों में जटिलता पैदा कर दी है। क्या ट्रंप और मोदी के बीच टैरिफ युद्ध से भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी?

 

ट्रंप प्रशासन ने भारत से होने वाले निवेश पर 50% तक की पाबंदियाँ लगाई हैं, जिससे अमेरिका में भारतीय निवेश प्रभावित हुआ है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया जब दोनों देशों के बीच कई व्यापारिक वार्ताएँ चल रही थीं। ट्रंप और उनके सहयोगियों ने बार-बार भारत की रूस से सस्ते तेल की खरीद पर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत रूस को आर्थिक रूप से मदद कर रहा है। वहीं, भारत ने स्पष्ट किया है कि तेल आयात उसकी ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू ज़रूरतों के लिए अनिवार्य है। यह स्थिति भारत को मुश्किल में डालती है—एक तरफ अमेरिका उसका सबसे बड़ा व्यापारिक बाजार है, तो दूसरी तरफ रूस ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है।

हालाँकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि चुनौतियों के बावजूद भारत और अमेरिका के रिश्तों में सुधार की संभावना बनी हुई है। दोनों देश आईटी, दवाइयों, परिधान और वाहनों जैसे क्षेत्रों में गहरे आर्थिक रूप से जुड़े हुए हैं। लेकिन ट्रंप की कठोर नीतियों और रूस पर भारत के रुख के चलते रिश्तों में तनाव बना रह सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत इस संतुलन को कैसे बनाए रखता है।

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख