भारतीय शेयर बाजार में हाल की गिरावट ने निवेशकों की चिंता जरूर बढ़ाई है, लेकिन तकनीकी और फंडामेंटल संकेतों को देखते हुए फिलहाल किसी बड़ी परेशानी की संभावना नहीं दिख रही है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि मौजूदा गिरावट सामान्य करेक्शन का हिस्सा है। उनके अनुसार बाजार में अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं आया है जिससे मौजूदा सकारात्मक दिशा बदलने की जरूरत पड़े। खास तौर पर 24,000 का स्तर बाजार के लिए निर्णायक बना हुआ है और इसके ऊपर टिके रहने तक बाय-ऑन-डिप्स की रणनीति जारी रखी जा सकती है।
विशेषज्ञ के मुताबिक बाजार में निवेश करने का तरीका पिछले कुछ वर्षों में बदल गया है। अब केवल इंडेक्स के ऊपर जाने का इंतजार करने के बजाय निवेशकों को मजबूत बिजनेस वाली कंपनियों की पहचान करनी होगी। कंपनियों के प्रदर्शन के आधार पर पोर्टफोलियो में बदलाव भी करना पड़ सकता है। उनका मानना है कि बाजार में कमाई के अवसर मौजूद हैं, लेकिन यह कमाई हर शेयर में नहीं होगी। इसलिए स्टॉक पिकिंग और रिस्क मैनेजमेंट पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
तकनीकी रूप से 20-डे मूविंग एवरेज को तत्काल सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। यदि बाजार इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो पॉजिटिव ट्रेंड बरकरार रह सकता है। वहीं 24,000 का स्तर टूटने पर सावधानी बढ़ानी होगी और बाजार की दिशा को लेकर दोबारा आकलन करना पड़ेगा। फिलहाल विशेषज्ञ 24,000 के ऊपर अपनी सकारात्मक राय में बदलाव नहीं करना चाहते। उनका मानना है कि गिरावट में खरीदारी का मौका तलाशना बेहतर रणनीति हो सकती है, बजाय इसके कि तेजी के दौरान ऊंचे स्तरों पर जल्दबाजी में खरीदारी की जाए।
दीपावली तक बाजार की संभावनाओं को लेकर भी विशेषज्ञ आशावादी हैं। उनका अनुमान है कि 24,000 से 26,000 के स्तर तक बाजार में करीब 10 फीसदी की तेजी की गुंजाइश बनती है। अगर कॉरपोरेट नतीजे और कारोबारी माहौल अनुकूल रहे तो दीपावली से पहले 10 से 15 फीसदी तक की रैली की संभावना भी बन सकती है। अक्टूबर से शुरू होने वाला अगला रिजल्ट सीजन बाजार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जबकि नवंबर में मिडकैप कंपनियों के नतीजे भी निवेशकों का ध्यान आकर्षित करेंगे।
अगले सप्ताह हालांकि बाजार में किसी बड़े ट्रिगर की कमी दिखाई दे रही है। ऐसे में बाजार के सपाट या सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना ज्यादा है। ग्लोबल स्तर पर भी फिलहाल ऐसा कोई बड़ा घटनाक्रम नहीं दिख रहा है जो बाजार को बहुत तेजी से ऊपर या नीचे ले जाए। इसके बावजूद अगर बाजार का सपोर्ट बना रहता है तो आने वाले हफ्तों में तेजी की नई शुरुआत हो सकती है। विशेषज्ञ के अनुसार मौजूदा थ्रोबैक के बाद जब बाजार दोबारा ऊपर की ओर बढ़ेगा, तो 200-डे मूविंग एवरेज के आसपास की बाधा को पार करके 25,200-25,300 के जोन की ओर बढ़ने की संभावना पर नजर रखनी चाहिए।
(शेयर मंथन, 17 अगस्त 2026)
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