शेयर मंथन में खोजें

हल्दी में तेजी का रुझान, धनिया में हो सकती है गिरावट - एसएमसी

हल्दी वायदा (जून) की कीमतों में 7,050-7,000 रुपये के ऊपर सहारे के साथ तेजी का रुझान रहने की संभावना हैं।
मौजूदा सीजन की समाप्ति के कारण उत्तर भारत से हल्दी के कुछ नये ऑर्डर मिलने की संभावना से हाजिर बाजारों में तेजी का सेंटीमेंट है। इरोद टर्मरिक मर्चेन्ट्स एसोसिएशन सेल्स यार्ड में फिंगर वेरायटी की कीमतें 6,119-8,355 रुपये प्रति क्विंटल और रूट वेरायटी की कीमतें 5,232-7,455 रुपये प्रति क्विंटल हैं। रेगुलेटेड मार्केट कमिटी में फिंगर वेरायटी की कीमतें 6,929-8,356 रुपये प्रति क्विंटल और रूट वेरायटी की कीमतें 6,445-7,479 रुपये क्विंटल हैं।
जीरा वायदा (जून) कीमतों में तेजी बरकरार रहने की संभावना है और कीमतें 16,520-16,600 रुपये तक पहुँच सकती हैं। कारोबारियों को आगामी दिनो में कीमतों में तेजी के रुझान की उम्मीद है, क्योंकि सीरिया में तनाव बढ़ रहा है और अनियमित मौसम के कारण उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है, जिससे भारत से वैश्विक निर्यात माँग में बढ़ोतरी हो सकती है। हाजिर बाजारों में नरमी के रुझान पर धनिया वायदा (जून) की कीमतों में 4,450 रुपये तक गिरावट जारी रह सकती है। किसानों द्वारा अपने पूराने स्टॉक की अधिक आवक के कारण बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कीमतों में गिरावट की आशंका से किसान से अपने स्टॉक की बिकवाली कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त धनिया की घरेलू कीमतों की तुलना में विदेशी बाजारों में कीमतें कम होने से रूस और बुल्गारिया से लगातार आयात के कारण नरमी का सेंटीमेंट बढ़ता जा रहा है। आयातित धनिया की कीमत 3,600-3,800 रुपये प्रति 100 किलो ग्राम है, जो 36.5% आयात शुल्क चुकाने के बावजूद 600-900 रुपये सस्ता है। (शेयर मंथन, 30 मई 2018)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख