शेयर मंथन में खोजें

डॉलर के मजबूती से सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ कारोबार करने की संभावना है। सोने (अगस्त) की कीमतों को 49,300 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 48,900 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी (जुलाई) की कीमतों में 71,600 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 70,700 रुपये पर सहारा रह सकता है।

डॉलर के मजबूत होने के कारण आज सोने की कीमतों पर दबाव है जबकि मुद्रास्फीति के दबाव को जानने और आर्थिक विकास पर स्पष्ट संकेतों के लिए निवेशकों को अमेरिकी आँकड़ों औरयूरोपीय सेंट्रल बैंक की नीतिगत बैठक का इंतजार है। सोने की हाजिर कीमतें 0.2% गिरकर 1,885.51 डॉलर प्रति औसतन के नजदीक कारोबार कर रही हैं जबकि सोना वायदा 0.4%0 गिरकर 1,888.80 डॉलर प्रति औसत पर कारोबार कर रहा है। डॉलर इंडेक्स अपने प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले थोड़ा मजबूत होकर 90.137 के करीब कारोबार कर रहा है, जिससे अन्य मुद्रा धारकों के लिए सोना कम आकर्षक हो गया। इस बीच, 7 मई के बाद पहली बार बेंचमार्क 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 1.50% से नीचे फिसल गया, जिससे गैर-ब्याज वाले बुलियन रखने की अवसर लागत कम हो गयी। ईसीबी की नीति का निर्णय आज होने वाला है, इसके बाद अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक रिपोर्ट भी आने वाली है, जिससे कीमतों में वृद्धि और आर्थिक समर्थन उपायों के भविष्य पर नीति निर्माताओं के दृष्टिकोण पर और स्पष्टता की उम्मीद है।
दुनिया में सोने के सबसे बड़े एक्सचेंज-ट्रेंडेड फंड एसपीडीआर गोल्ड ट्रस्ट की होल्डिंग बुधवार को 0.6% बढ़कर 1,043.16 टन हो गयी, जो मंगलवार को 1,037.33 टन थी। चांदी की कीमतें 0.1% की गिरावट के साथ 27.73 डॉलर प्रति औसत पर आ गयी। (शेयर मंथन, 10 जून 2021)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख